TDP in Telangana: अलग तेलंगाना राज्य बनाने की मांग तो वर्षों से चल रही थी. कांग्रेस की यूपीए सरकार ने सत्ता जाने से पहले आंध्र प्रदेश का विभाजन करके अलग तेलंगाना राज्य बना दिया था, लेकिन कांग्रेस को यह फैसला उलटा पड़ गया था. तेलंगाना में वे सरकार नहीं बना पाए. आंध्र प्रदेश के लोग इतना गुस्सा गए कि 10 साल से हर चुनाव में कांग्रेस का सफाया हो रहा है. यानी की तेलंगाना बनने के बाद से कांग्रेस चुनाव हारती रही.
न्यूज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में कांग्रेस की किस्मत रेवंत रेड्डी ने बदली और कांग्रेस की सरकार बनाई. ये देख चंद्रबाबू नायडू भी तेलंगाना को लेकर बड़ा प्लान बना रहे हैं. उनका हमेशा से कहना है कि तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) तेलुगु लोगों की सेवा के लिए बनी है और तेलंगाना में तेलुगु लोग रहते हैं इसलिए तेलंंगाना में टीडीपी होनी चाहिए. 2028 से पहले तेलंगाना में कोई चुनाव नहीं होने वाला है. इस बीच चंद्रबाबू नायडू तेलंगाना में विस्तार का प्लान बना लिया है.
नए सिरे से शुरुआत करेगी TDP
तेलंगाना को लेकर चंद्रबाबू नायडू ने अपने इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट के साथ काम करना शुरू भी कर दिया है. उन्होंने प्रशांत किशोर, रॉबिन शर्मा को तेलंगाना का टास्क दिया है. इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत महबूब नगर से हो सकती है. इस प्लान के तहत तेलंगाना में नए सिरे से टीडीपी का सदस्यता अभियान चलेगा. नए लोगों को पार्टी से जोड़ा जाएगा. वो हर दूसरे सप्ताह में कोई न कोई राजनीतिक एक्टिविटी करेंगे. बीआरएस छोड़ चुके लोगों को भी पार्टी से जोड़ा जाएगा.
प्रशांंत किशोर और रॉबिन शर्मा करेंगे काम
टीडीपी का पहला टारगेट अगले साल ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल चुनाव लड़ना है. इससे भी बड़ा चैलेंज ये है कि तेलंगाना में टीडीपी का ऐसा नेता पेश करना है जो चंद्रबाबू नायडू के लेवल का हो. साल 2023 में ये कहा जा रहा था कि प्रशांत किशोर टीडीपी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार कर दिया था. साल 2024 में रॉबिन शर्मा ने चंद्रबाबू नायडू के लिए काम किया था. इसके बाद फिर एक बार दोनों पॉलिटिकल एडवाइजर चंद्रबाबू नायडू के लिए काम करने वाले हैं.
कभी साथ हुआ करते थे रेड्डी और नायडू
तेलंगाना में चंद्रबाबू नायडू का आना कांग्रेस से ज्यादा रेवंत रेड्डी के लिए बड़ा चैलेंज होगा. रेवंत रेड्डी चंद्रबाबू नायडू के पुराने राजनीतिक शिष्य रहे हैं. रेवंत रेड्डी की राजनीति चंद्रबाबू की छत्रछाया में आंध्र प्रदेश में ही फली फूली थी. वे इतने करीबी थे कि एमएलसी चुनाव में टीडीपी उम्मीदवार को जिताने के लिए जोर लगाते लगाते कैश फॉर वोट घूस कांड में फंस गए थे. रेवंत रेड्डी जेल तक जाना पड़ा था, जिसका आज तक केस चल रहा है.
टीडीपी के आने से तेलंगाना का मैच होगा ट्रायंगुलर
तेलंगाना की राजनीति में रेवंत रेडी फुल टाइम एक्टिव उस समय हुए, जब वह टीडीपी छोड़कर कांग्रेस में आए. तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष बने. तेलंगाना में टीडीपी की एक्टिविटी रेवंत रेड्डी के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. टीडीपी के आने से तेलंगाना का मैच ट्रायंगुलर हो जाएगा. टीडीपी के साथ एक मजबूत मोर्चा आएगा, जिसमें बीजेपी और जेसीपी भी शामिल हो सकती है.
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