भारत ने बढ़ाया रक्षा बजट, अब सेना के स्ट्रक्चर में होंगे ये बदलाव, चीन से कैसे होगा अलग?

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भारत की तीनों सेना आर्मी, नेवी और एयर फोर्स अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. यह बदलाव इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स के रूप में आ रहा है, जो सेना को ज्यादा तेज, एकजुट और मजबूत बनाएगा. भारत की मिलिट्री अब इन्फ्लेक्शन पॉइंट (बड़ा मोड़) पर है. यानी पुरानी व्यवस्था से नई, आधुनिक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है.

थिएटर कमांड्स क्या हैं और क्यों जरूरी?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भारत की सेना में तीनों सर्विसेज (आर्मी, नेवी, एयर फोर्स) अलग-अलग काम करती हैं. हर सर्विस का अपना नेटवर्क, डॉक्ट्रिन (रणनीति), इंटेलिजेंस और कमांड सिस्टम है. अगर आर्मी को एयर सपोर्ट चाहिए, तो कई लेयर्स से गुजरना पड़ता है, जिसमें देरी हो जाती है. यह ब्रिटिश राज से चली आ रही पुरानी व्यवस्था है, जहां सर्विसेज अलग ‘साइलोज’ (अलग-अलग कमरे) में काम करती हैं. 

लेकिन अब थिएटर कमांड्स में यह बड़े बदलाव होंगे:

  • भौगोलिक इलाकों (थिएटर्स) के आधार पर तीनों सर्विसेज को एक कमांडर के नीचे लाया जाएगा.
  • एक ही कमांडर सभी सर्विसेज के सैनिकों, हथियारों और संसाधनों को कंट्रोल करेगा.
  • फैसले तेज होंगे, ऑपरेशंस ज्यादा सटीक और एकजुट होंगे.
  • इसमें साइबर, स्पेस और अन्य डोमेन भी शामिल होंगे.  

यह अमेरिका, चीन और रूस जैसी बड़ी सेनाओं में पहले से है. चीन के पास 5 थिएटर कमांड्स हैं, जो बहुत प्रभावी हैं. भारत के लिए यह जरूरी है क्योंकि पड़ोस में चीन और पाकिस्तान दोनों से खतरा है और हिंद महासागर में भी सुरक्षा बढ़ानी है.

भारत के कितने थिएटर कमांड्स होंगे?

अब बात तीन थिएटर कमांड्स पर पहुंच गई है. इनमें:

1. वेस्टर्न थिएटर कमांड: मुख्य रूप से पाकिस्तान पर फोकस.
2. ईस्टर्न थिएटर कमांड: मुख्य रूप से चीन पर फोकस.
3. मैरिटाइम थिएटर कमांड: हिंद महासागर, 7,000 किलोमीटर तट, 1,062 द्वीपों और पड़ोसी देशों (मालदीव, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल, मॉरीशस, सेशेल्स) की सुरक्षा.

अंडमान एंड निकोबार का मौजूदा ट्राई-सर्विस कमांड CDS के अधीन है. इसे ईस्टर्न या मैरिटाइम में शामिल करने पर चर्चा है, क्योंकि चीन मुख्य खतरा है. पाकिस्तान और चीन का सामना नॉर्दर्न कमांड को कैसे हैंडल करना है, यह भी चुनौती है.

इंटीग्रेटेड थियेटर कमांड का प्लान बना कब था?

  • 1999 के कारगिल रिव्यू कमिटी ने CDS और थिएटर कमांड्स की सिफारिश की थी.
  • 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CDS पोस्ट बनाई.
  • पहले CDS जनरल बिपिन रावत ने टॉप-डाउन अप्रोच से थिएटर कमांड्स को तेजी से आगे बढ़ाया, लेकिन दिसंबर 2021 में हेलीकॉप्टर क्रैश में उनकी मौत हो गई, जिससे काम रुक गया.
  • अब CDS जनरल अनिल चौहान बॉटम-अप, कंसेंसस अप्रोच से काम कर रहे हैं. दोनों CDS थिएटर कमांड्स को जरूरी मानते हैं.
  • जनरल चौहान ने यूनिफाइड कम्युनिकेशन बैकबोन बनाया है, जिससे तीनों सर्विसेज के कमांडर्स सीधे बात कर सकते हैं.
  • डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कॉन्सेप्ट को प्रिंसिपल में अप्रूव किया. NSA अजीत डोभाल ने प्रपोजल्स देखे. तीनों सर्विस चीफ्स और CDS ने एक डॉक्यूमेंट में सहमति दी.
  • PM मोदी ने सितंबर में कोलकाता के कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में थिएटर कमांड्स बनाने का डायरेक्टिव दिया.

अब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को नोट भेजा जाएगा. यह 30 मई 2026 को जनरल चौहान के रिटायरमेंट से पहले हो सकता है.

बजट 2026-27 का बड़ी तैयारी का बड़ा सिग्नल
 
1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया. डिफेंस बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी नई खरीद में 22% बढ़ोतरी की गई है. मॉडर्नाइजेशन बजट में 24% इजाफा हुआ है. यह बजट थिएटर कमांड्स के लिए ‘पहला हार्ड इंडिकेटर’ है कि सरकार सीरियस है. यह पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटीग्रेटेड कमांड्स, नए एसेट्स के लिए जाएगा. इसका फोकस इंडिजिनस मैन्युफैक्चरिंग और एशिया में डॉमिनेंस बढ़ाना है.

ऑपरेशन सिंदूर से सबक के तहत लिया फैसला
  
2025 में पहलगाम अटैक के बाद ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार सर्विस चीफ्स और CDS एक कमरे में बैठकर कोऑर्डिनेट हुए. नतीजा यह निकला कि टेरर कैंप्स पर तेज और सटीक हमला किया जाए. PM मोदी ने कहा, ‘जो करना है करो’ यानी माइक्रोमैनेजमेंट नहीं. यह ऑपरेशन थिएटर कमांड्स के फायदे दिखाता है.


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