ZEE Jankari: पीएम मोदी के स्‍वतंत्रता दिवस पर दिए भाषण का विश्‍लेषण

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The Strength Of A Nation Derives From The Integrity Of The Home…..यानी घर की एकता से ही.. एक राष्ट्र को ताकत मिलती है। ये कहना था…चीन के महान दार्शनिक Confucius का और DNA में हमारा पहला विश्लेषण भी इसी विचार से प्रेरित है. आज मेरा…आपका…और हम सबका भारत…आज़ादी के 73 वर्षों का जश्न मना रहा है. आप ये भी कह सकते हैं…कि 135 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला भारत अब Young At 73 हो गया है. लेकिन, कुछ बातें ऐसी हैं…जो आज़ादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी हमें ग़ैर-ज़िम्मेदार बनाती हैं. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का विश्लेषण करने से पहले, हम कुछ प्रश्नों के साथ आपसे एक छोटा सा संवाद करना चाहते हैं.

क्या आप सच्चे देशभक्त हैं? या फिर सुविधा के हिसाब से देशभक्ति की परिभाषा बदलते रहते हैं? हम जानते हैं, कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आज दिनभर आपके मन में देशभक्ति की लहरें उठी होंगी. आज सुबह से ही आप देशभक्ति के गीत सुन रहे होंगे..बॉर्डर और उपकार जैसी फिल्मों के गीत आपके कानों तक पहुंच रहे होंगे …अगर आज आप Shopping Mall गए होंगे या फिर बाजार गए होंगे, तो आपकी निगाह तिरंगे पर जरूर पड़ी होगी. हो सकता है कि आपने भी एक तिरंगा खरीदकर अपनी गाड़ी या अपने घर या अपने दफ्तर में लगाया होगा.

Social Media पर अपनी DP यानी Display Picture बदल दी होगी. लेकिन आपने ये भी गौर किया होगा, कि 15 अगस्त या 26 जनवरी के अगले दिन देश भक्ति की ये भावना फीकी पड़ जाती है. तिरंगे को देखकर आने वाला जोश और देश से जुड़ी सारी संवेदनाएं ठंडी हो जाती हैं  और लोग फिर से अपनी पुरानी दिनचर्या पर लौट आते हैं. लोग ट्रैफिक के नियमों की अनदेखी करने लगते हैं. दफ्तर खुलते ही रिश्वत लेने का दौर शुरू हो जाता है. किसी ना किसी शहर या गांव में कोई ना कोई महिला हिंसा का शिकार होती है. लेकिन हम कुछ नहीं करते. क्योंकि हमारी नज़र में 15 अगस्त या 26 जनवरी का दिन गुज़र चुका होता है और हम अपनी देशभक्ति की भावना को अगले स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के लिए Reserve कर लेते हैं. हम स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस के जश्न को.. सिर्फ एक ख़ास दिन पर मनाना चाहते हैं. क्योंकि ऐसा करके हम देशभक्त कहलाने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं. अगले दिन से सबकुछ पहले जैसा हो जाता है.

हमारी ये आदत बताती है कि हम ऐसे दिनों को भी एक दिवसीय त्यौहार की तरह की मनाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे होली… दीवाली या ईद मनाई जाती है. हमारे देश में देशभक्ति को भी Fast Food और दो मिनट में पकने वाली Instant Noodles जैसा बना दिया गया है. जो मिनटों में तैयार होती है और मिनटों में ही खत्म भी हो जाती है. एक देश के तौर पर जबतक हम इस गैर-ज़िम्मेदार मानसिकता से बाहर नहीं निकलेंगे, तबतक हमें सच्चा देशभक्त कहलाने का हक नहीं है, क्योंकि, एक दिन की देशभक्ति.. देश के काम नहीं आती.. और ना ही उससे किसी नागरिक के कर्तव्य पूरे होते हैं. इसलिए स्वतंत्रता दिवस के दिन आप सभी को ये प्रण लेना होगा, कि नए भारत के निर्माण के लिए आपकी सोच भी नई हो और पूरे 365 दिनों तक देश की सेवा करने की भावना भी हो.

देश के प्रति ज़िम्मेदारी और समर्पण की इसी भावना के साथ आज के विश्लेषण की शुरुआत करते हैं और लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण को De-Code करते हैं.  अपने नए कार्यकाल में लाल किले पर तिरंगा फहराते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लाल किले पर छठी बार तिरंगा फहराने वाले दूसरे ग़ैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन गए हैं. इससे पहले बतौर प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल में 6 बार तिरंगा फहराया था. लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने वाले प्रधानमंत्रियों की सूची में नरेंद्र मोदी 5वें स्थान पर आ गए हैं.

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 17 बार लाल किले से झंडा फहराया था. दूसरे नंबर पर उनकी बेटी इंदिरा गांधी हैं, जिन्हें 16 बार ये मौका मिला.  मनमोहन सिंह ने 10 बार और राजीव गांधी ने 5 बार लाल किले से झंडा फहराया था. इस बार प्रधानमंत्री मोदी का भाषण बेहद ख़ास था. क्योंकि ये उनके दूसरे कार्यकाल का पहला भाषण था. प्रधानमंत्री के तौर पर लाल किले के प्राचीर से नरेंद्र मोदी ने छठी बार देश को संबोधित किया. वो भी पूरे 92 मिनट तक.

इससे पहले वर्ष 2018 में उनका भाषण 82 मिनट लम्बा था. 2017 में 57 मिनट, 2016 में 96 मिनट, 2015 में 86 मिनट और 2014 में उन्होंने 65 मिनट लम्बा भाषण दिया था.

इस लिहाज़ से देखा जाए, तो प्रधानमंत्री का आज का भाषण 6 वर्षों में दूसरा सबसे बड़ा भाषण था. किसी भी भाषण को समझने का सबसे आसान तरीका ये है कि उस भाषण में प्रयोग हुए शब्दों का विश्लेषण किया जाए और ये जानने की कोशिश की जाए कि कौन से शब्द कितनी बार प्रयोग किए गए? इससे ये पता चलेगा कि सरकार का Focus किन बातों पर है?

इस बार 92 मिनट के भाषण में नरेंद्र मोदी ने देश या देशवासी शब्द का प्रयोग 170 बार किया. और 49 बार भारत का ज़िक्र किया. यानी उनके पूरे भाषण में भारत और भारत के देशवासी …यानी आप सभी लोग छाए रहे. इसके अलावा उन्होंने 31 बार आज़ादी शब्द का प्रयोग किया. 6 बार जनसंख्या और आबादी का ज़िक्र किया. 16 बार ग़रीब, 17 बार किसान और 10 बार विकास की बात कही.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पानी और जल पर भी ज़ोर दिया. इन दोनों ही शब्दों का इस्तेमाल उन्होंने 42 बार किया. प्रधानमंत्री ने 6 बार जम्मू-कश्मीर, 2 बार लद्दाख, 8 बार अनुच्छेद 370, 6 बार 35 A, 10 बार आतंकवाद और 8 बार सुरक्षा का ज़िक्र किया. इस दौरान 15 बार उन्होंने जंग या युद्ध शब्द का भी प्रयोग किया.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी Speech में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ज़िक्र करते हुए, भारत की आज़ादी में उनके योगदान को नमन किया. लेकिन अपने भाषण में सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए उन्होंने सबसे ज़्यादा वक्त Article 370 और 35 A पर दिया. क़रीब 10 मिनट तक इस विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने देश को बताया, कि कैसे पिछले 70 साल में इन व्यवस्थाओं ने अलगाववाद को जन्म दिया. आतंकवाद को जन्म दिया. परिवारवाद को जन्म दिया. साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया, कि सत्ता के शिखर पर बैठी पार्टियों ने कभी भी अनुच्छेद 370 या 35 A हटाने की हिम्मत नहीं दिखाई. क्योंकि, ऐसा करने पर उनका राजनीतिक भविष्य ख़तरे में पड़ जाता.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के लिए देश की आम जनता से उनके सुझाव भी मांगे
थे. नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की थी, कि वो 15 अगस्त को लाल किले से किस तरह का भाषण सुनना चाहते हैं.  इसपर Namo App के ज़रिए अपनी राय दें. यानी आप कह सकते हैं, कि प्रधानमंत्री का ये भाषण, जनता का, जनता के लिए, और जनता द्वारा तैयार किया गया भाषण था.

जिस प्रकार नरेंद्र मोदी की सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाकर दोनों को एक नई शक्ति दी है. ठीक उसी प्रकार से मुस्लिम महिलाओं के मान और सम्मान के लिए भी केंद्र सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी. मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक से आज़ादी दिलाना मौजूदा सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक है. प्रधानमंत्री मोदी ने आज अपने भाषण में बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर का ज़िक्र करते हुए इस विषय पर भी देश का ध्यान आकर्षित किया.

प्रधानमंत्री की बातें सुनने के बाद आप समझ गए होंगे, कि इस बार उनका भाषण कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक…सबके लिए था. बुनियादी तौर पर उनका भाषण, भारत और भारतवासियों पर केन्द्रित थी. जिसमें New India के निर्माण की झलक भी दिखती है. नरेंद्र मोदी ने आज भाई-भतीजावाद और पुराने क़ानूनों का ज़िक्र करते हुए आम आदमी की पीड़ा भी देश को बताई और कहा, कि नए भारत में इन दोनों के लिए कोई स्थान नहीं है.

आज हमने प्रधानमंत्री के भाषण में एक और बात Note की. उन्होंने 92 मिनट में 10 बार आतंकवाद और 8 बार सुरक्षा का ज़िक्र किया. इस दौरान 15 बार उन्होंने जंग या युद्ध शब्द का भी प्रयोग किया. लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण की सबसे दिलचस्प बात ये थी, कि उन्होंने 92 मिनट में एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. जब हमने 2014 से लेकर 2019 तक के भाषण को Decode करने कोशिश की. तो हमें एक दिलचस्प बात पता चली.

नरेंद्र मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद दिए अपने पहले भाषण में भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था. उन्होंने 2015 में भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. 2016 में उन्होंने पाकिस्तान का ज़िक्र तो नहीं किया, लेकिन 12 बार आतंकवाद का ज़िक्र करते हुए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर की बात ज़रुर की थी.

ठीक इसी तरह 2017 में भी उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. लेकिन 8 बार आतंकवाद या आतंक शब्द का ज़िक्र किया था. जबकि 2018 के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने ना तो पाकिस्तान का नाम लिया था और ना ही आतंकवाद का ज़िक्र किया था. इस बार भी नरेंद्र मोदी ने वही किया, जो 2014 से करते आए हैं. यानी बिना पाकिस्तान का नाम लिए, आतंकवाद के विषय पर उसे Expose कर दिया.

भारत के प्रधानमंत्री ने तो अपनी Speech में पाकिस्तान को कोई समय नहीं दिया. लेकिन इमरान खान ने कल अपना पूरा भाषण भारत और कश्मीर को समर्पित कर दिया था. 36 मिनट के भाषण में इमरान ख़ान ने करीब 14 बार नरेंद्र मोदी, 26 बार हिंदुस्तान, 26 बार कश्मीर, 10 बार RSS, और तीन बार बीजेपी का जिक्र किया था. इससे आप समझ सकते हैं, कि इस वक्त पाकिस्तान के दिमाग में सिर्फ और सिर्फ भारत और कश्मीर चल रहा है.

आज प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि देश को जल्दी ही CDS यानी Chief of Defence Staff मिलेगा. सेना को और बेहतर बनाने…और इसके तीनों अंगों…यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच मज़बूत तालमेल के लिये इसे क्रांतिकारी फ़ैसला कहा जा रहा है.

CDS उस अफ़सर को बनाया जाएगा…जो तीनों फोर्स में सबसे वरिष्ठ होगा. CDS एक 5 सितारों वाला अधिकारी होना चाहिये, हालांकि रैंक पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी और संभावना है कि दो महीनों में वो अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी.

CDS को एक तरह से तीनों सेनाओं का Commander कहा जाएगा. CDS की अहमियत इसलिये भी ज़्यादा होगी, क्योंकि अब हमारे पास परमाणु हथियार के साथ अंतरिक्ष से जुड़े Assets यानी सामरिक उपग्रह हैं, जिनके इस्तेमाल के लिये सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल चाहिये. भविष्य में युद्ध छोटे पैमाने पर लड़े जाएंगे और इसमें Army, Air Force और Navy को लेकर One Point Leadership यानी एक नेतृत्व की ज़रूरत होगी. पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सैन्य तैयारी के रूप में हमारी देश की सभी Forces ने इसी तरह काम किया था.

ख़ुफ़िया एजेंसियों और सेनाओं के बीच भी तालमेल बेहतर होगा, ताकि हर Intelligence पर मिलकर काम किया जा सके. इसलिये अब NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ CDS का पद भी देश की सुरक्षा में एक मज़बूत स्तंभ की तरह काम करेगा.

उसका काम प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री को उन मुद्दों पर सलाह देना होगा…जो देश की रक्षा और सामरिक मुद्दों से जुड़े होंगे. तीनों सेनाएं भी अपनी ज़रूरत के बारे में सरकार को ज़्यादा प्रभावी तरीक़े से बता पाएंगी, चाहे वो हथियारों की ख़रीद हो…या फिर अलग-अलग कमांड की ज़रूरतें हो.

सेनाएं अपनी प्लानिंग बेहतर तरीक़े से कर पाएंगी. Army, Air Force और Navy के चीफ पूरी तरह अपनी फ़ोर्स पर ध्यान दे पाएंगे और CDS उनके प्रतिनिधि के तौर पर सरकार से बात करेंगे. CDS पद के प्रस्ताव के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी का सपना भी पूरा कर दिया है. वर्ष 1999 में उन्हीं की सरकार के दौरान हुए कारगिल युद्ध के बाद Kargil Review Committee बनाई गई थी.

इस कमेटी ने CDS का पद बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन राजनीतिक सहमति ना होने की वजह से ये प्रस्ताव, प्रस्ताव ही रह गया. लेकिन अब इस मुद्दे पर कोई असहमति नहीं है…आज CDS को लेकर प्रधानमंत्री का ऐलान ये साबित करता है.

Article 370…और Triple Talaq क़ानून के बाद CDS पद का गठन नरेंद्र मोदी सरकार का सबसे बड़ा फ़ैसला कहा जाएगा. वैसे मोदी सरकार ने खास ऑपरेशन के लिये तीनों सेनाओं की तीन साझा एजेंसियां पहले ही बना दी हैं. ये हैं Defence Cyber Agency जिसमें नौसेना की मुख्य भूमिका होगी, दूसरी है Defence Space Agency, जिसमें वायु सेना नेतृत्व करेगी और तीसरी है स्पेशल ऑपरेशन डिवीज़न, जिसका नेतृत्व थल सेना करेगी.
अभी भारत में Chiefs of Staff Committee के अध्यक्ष का पद है…और तीनों सेनाओं के प्रमुख में जो सबसे वरिष्ठ होता है…वही इस Committee का प्रमुख होता है. अभी वायु सेना के अध्यक्ष Air Chief Marshal बी एस धनोआ Chiefs of Staff Committee के Chairman हैं.

लेकिन देश के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं…और जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि सैन्य व्यवस्था, सैन्य शक्ति और सैन्य संसाधन में सुधार लाने की ज़रूरत है. वर्ष 1962 में जब भारत का चीन के साथ युद्ध हुआ था…तो वायु सेना का बेहतर इस्तेमाल नहीं किया गया था और ऐसी बहुत सी कमियों की वजह से ही भारत ये जंग हार गया था.

वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में भारतीय नौसेना का और अच्छी तरह इस्तेमाल कर सकता था. कहा जाता है कि नौसेना को पूरे प्लान की जानकारी नहीं थी.वर्ष 1987 में जब भारत ने श्रीलंका में Peace Keeping Force भेजी थी…तब तीन वर्षों तक LTTE के आतंकवादियों से लड़ते हुए भारत के 1,157 सैनिक शहीद हुए थे. ये भारत की बहुत बड़ी नाकामी थी…और इसकी एक बड़ी वजह प्लानिंग की कमी थी.

1999 में कारगिल के युद्ध के बाद भारत ने CDS के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया था…और अब 20 वर्षों बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे मुमकिन बना दिया है. कारगिल युद्ध के बाद तीनों सेनाओं की एकीकृत कमान के लिए Integrated Defence Staff की स्थापना की गई थी. लेकिन CDS बनने के बाद इस कमान का क्या होगा, ये अभी तय नहीं है. Chief of Defence Staff का पद भारत के लिये नया है…लेकिन दुनिया में 70 से ज़्यादा देश इस सैन्य व्यवस्था को बहुत पहले अपना चुके हैं…और कामयाब भी रहे हैं.

अमेरिका, Russia, फ्रांस, जर्मनी, Canada और चीन की सेनाओं में CDS या इसके जैसा ही पद है. चीन और अमेरिका में CDS के तहत थियेटर कमांड सिस्टम बना हुआ है. एक थियेटर कमांड के तहत थल सेना, वायु सेना और नौसेना की अलग-अलग टुकड़ी आती हैं, जो एक साथ, एक कमांडर के नेतृत्व में काम करती हैं. जैसे अमेरिका में अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया जैसे युद्ध क्षेत्रों के लिये अलग कमांडर हैं.

चीन में भी पश्चिमी मोर्चे को लेकर एक अलग कमांडर नियुक्त किया गया है…जो भारत के साथ युद्ध के हालात में सैन्य ऑपरेशन का नेतृत्व करेगा. इसलिये अब भारत को भी ऐसी ही व्यवस्था की ज़रूरत है. हमारी सेना भी अमेरिका और चीन की सेना की तरह आधुनिक बन रही है. Technology के बढ़ते इस्तेमाल के साथ हमें पुरानी व्यवस्था को बदलना ही होगा.

वैसे आज स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के साथ-साथ उनके साफ़े की भी चर्चा हो रही है. आज प्रधानमंत्री ने पीले रंग का साफा पहना था, जिस पर लाल और हरे रंग की पट्टियां बनी हुई थीं. पिछले वर्ष 2018 को उन्होंने केसरिया रंग का साफा पहना था, जिसकी किनारी लाल रंग की थी. वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री ने पीले और लाल रंग का साफा पहना था.

2016 में उन्होंने लाल-गुलाबी और पीले रंग का राजस्थानी साफा पहना हुआ था. 2015 में भी वो लाल और पीले रंग के साफे में नज़र आए थे. और 2014 में अपने पहले भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नांरगी और हरे रंग का जोधपुरी साफा बांधा था. ये एक नई परंपरा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से निभाते आ रहे हैं. वैसे प्रधानमंत्री मोदी का Salute भी आज चर्चा में है. आज प्रधानमंत्री मोदी ने तिरंगे को सलामी देते हुए जिस तरह Salute किया…वो बात सीखने वाली है. बहुत कम लोग जानते होंगे कि थल सेना, वायु सेना और नौसेना में अलग-अलग तरीक़े से Salute किया जाता है.

आज प्रधानमंत्री मोदी ने Navy वाले तरीक़े से Salute किया. इससे पहले वो थल सेना और वायु सेना के तरीक़े से भी Salute करते रहे हैं. सेना में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सम्मान देने के लिये Salute किया जाता है और सेना के तीनों अंगों में ये अलग-अलग तरीक़े से किया जाता है.

Army में Salute करते वक़्त हाथ का पंजा पूरी तरह नज़र आता है. नौसेना में पंजा मुड़ा हुआ और ज़मीन की तरफ़ हल्का सा झुका हुआ होता है, जबकि वायु सेना में Salute करते वक़्त पंजा 45 डिग्री पर होता है.

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