VHP Alok Kumar On ASI Report Says Handover Gyanvapi Structure To Hindus

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VHP On Gyanvapi Mosque: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय  कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने शनिवार (27 जनवरी) को वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट के संबंध में एक बयान जारी करते हुए दावा किया कि मस्जिद मंदिर के ऊपर बनाई गई थी. उन्होंने मांग की विवादित जगह पर तथाकथित वजूखाना क्षेत्र में हिंदुओं को शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति दी जाए.

आलोक कुमार ने ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली इंतेजामिया कमेटी से भी आग्रह किया कि मस्जिद को आदरपूर्वक किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरिक किया जाए और परिसर को हिंदुओं को सौंप दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि इससे दोनों समुदायों के बीच सद्भावना और शांति का निर्माण होगा. 

विश्व हिंदू परिषद की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब दो पहले ही ज्ञानवापी परिसर को लेकर एएसआई की सर्वे रिपोर्ट की बात सामने आई.

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने गुरुवार (25 जनवरी) को दावा किया था कि एएसआई के एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट से पता चलता है कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के एक अवशेष पर किया गया था. उन्होंने दावा किया था कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में उस स्थान पर मंदिर के अस्तित्व के पर्याप्त सबूत हैं, जहां अब मस्जिद है.

क्या कहा आलोक कुमार ने?

आलोक कुमार ने कहा, ”ज्ञानवापी मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने उस पूरे ढांचे का वैज्ञानिक और गहराई से अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है. उन्होंने वहां से सारे प्रमाण भी इकट्ठा किए हैं. उन सबका का अध्ययन करके हम इस निर्णय पर पहुंचे हैं कि एक मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर ये मस्जिद बनाई गई. उस मंदिर का एक हिस्सा खासतौर पर वेस्टर्न वॉल (पश्चिमी दीवार), ये तो मंदिर की ही इस्तेमाल कर ली गई मस्जिद बनाने में.”

‘उस स्थान की प्रकृति अभी भी एक मंदिर की’

आलोक कुमार ने कहा, ”पुराने मंदिर के पिलर्स और बाकी चीजों को उस मस्जिद के बनाने में और उसके सहन में खर्च किया गया है. वहां पर जो वजूखाने में शिवलिंग मिलता है, उससे भी ये साबित होता है कि ये जगह मस्जिद नहीं हो सकती, यह जगह तो मंदिर है. जो शिलालेख मिले हैं उसमें जनार्दन, रुद्र, उमेश्वर ऐसे नाम हैं. ये सब बात इस बात को प्रमाणित करती है कि उस स्थान की प्रकृति अभी भी एक मंदिर की है.”

उन्होंने कहा, ”जो प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट हैं 1991 का, वो कहता है कि जिस धार्मिक स्थान की जो प्रकृति होगी वो बदली नहीं जाएगी. मैं समझता हूं कि हम ये साबित कर सके हैं एएसआई रिपोर्ट के द्वारा कि उस स्थान की प्रकृति मस्जिद की नहीं, अभी भी एक मंदिर की है.”

विश्व हिंदू परिषद ने की ये मांग

अपने बयान में आलोक कुमार ने विश्व हिंदू परिषद की दो प्रमुख मांगों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, ”हिंदू समाज को, जिसको वजुखाना कहा जाता था, उस जगह पर स्थापित शिवलिंग की सेवा और पूजा की अनुमति दी जाए.”

उन्होंने कहा, ”हम इंतजामिया कमेटी से भी आग्रह करते है कि सब प्रमाण सामने आने के बाद अब यह अच्छा होगा वह स्वयं इस बात को कहें कि वह इस मस्जिद को किसी दूसरे स्थान पर, उपयुक्त स्थान पर आदरपूर्वक स्थानांतरित करने के लिए तैयार हैं और यह जगह हिंदुओं को सौंप दें. यदि वह ऐसा करते हैं तो उससे भारत के दोनों समुदायों के बीच में एक सद्भावना का निर्माण होगा, शांति का निर्माण होगा और मस्जिद भी अपने विस्थापित स्थान पर आदरपूर्वक रह सकेगी. इसके लिए हम आगे के समय में प्रतीक्षा करेंगे.”

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