more than 300 Pakistani Hindus are waiting for their voter id before delhi assembly elections

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Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से पहले पाकिस्तानी हिंदुओं का मामला चर्चा में आ गया है. ये वे लोग हैं, जिन्होंने धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए पाकिस्तान से भारत में शरण ली थी. पाकिस्तान से आए लगभग 300 से अधिक हिंदू परिवार भारतीय नागरिकता मिलने के बाद अपने मतदान पहचान पत्र का इंतजार कर रहे हैं.

मई 2024 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत दिल्ली में लगभग 300 से अधिक पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई थी. इनमें से 300 लोगों ने अपने मतदाता पहचान-पत्र के लिए आवेदन किया है.

रोजगार और आर्थिक चुनौतियां
अधिकांश के पास आधार कार्ड है. उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही राशन कार्ड भी मिल जाएंगे. दिल्ली के एक शिविर में 217 परिवार रहते हैं, जिनकी कुल संख्या लगभग 1,000 है. समुदाय के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. ज्यादातर महिलाएं गृहिणी हैं, जबकि पुरुष दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं. छोटे-मोटे कियोस्क चलाकर फोन एक्सेसरीज बेचते हैं.

क्या बोले शरणार्थी ?
एक शरणार्थी राधा ने कहा, “हमें और रोजगार के अवसरों की आवश्यकता है. बेरोजगारी हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है.” 50 वर्षीय पूरन, जो पाकिस्तान में किसान थे, उन्होंने सरकार से यमुना के किनारे भूमि पट्टे देने की अपील की है, ताकि भूमि मिलने पर वे परिवारों के भरण-पोषण के लिए खेती शुरू कर सकें. पूरन ने कहा, “मेरे बच्चे मुझसे ज़मीन खरीदने के लिए कहते हैं, लेकिन हमारे पास पैसे नहीं हैं, सरकार अगर हमारी मदद करे तो हम खेती कर सकते हैं.”

नागरिकता के बाद की चुनौतियां
नागरिकता प्राप्त होने के बावजूद ये समुदाय अभी भी स्थिरता और रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है. नागरिकता मिलने के बाद वे उम्मीद करते हैं कि उन्हें अधिक स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे. उन्हें बेहतर आवास सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा का इंतजार है. शरणार्थियों का कहना है, “हमारे समुदाय को उम्मीद है कि सरकार उनकी मदद के लिए ठोस कदम उठाएगी.”

लोकतंत्र में भागीदारी
पहली बार मतदान का मौका पाकर वे भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हैं. यह मुद्दा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए चर्चा का केंद्र बन सकता है. आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी बीजेपी CAA की सफलता के रूप में इसे पेश कर सकता है, जबकि विपक्ष इनकी समस्याओं और मांगों को मुद्दा बना सकती है.

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