Maharashtra NCP Political Crisis Is It Possible Sharad Pawar To Convince Ajit Pawar

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Maharashtra Politics Crisis: एनसीपी की बगावत से महाराष्ट्र ही नहीं देश भर की राजनीति पर असर पड़ेगा. हालांकि, इस बात के कयास काफी समय से लगाए जा रहे थे कि अजित पवार के मन में क्या कुछ चल रहा है. रविवार (2 जुलाई) को इसकी तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई है. उन्होंने बीजेपी की अगुआई वाले गठबंधन यानी एनडीए का दामन थामकर अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है. 

अब सवाल यह उठने लगे हैं कि क्या हर बार की तरह एनसीपी में अंत में सबकुछ ठीक हो जाएगा या इस बार अजित पवार की घर वापसी मुश्किल होगी. दरअसल, एनसीपी में लंबे समय से मतभेदों की खबरें सामने आ रही थी, लेकिन अजित पवार और शरद पवार इन्हें केवल अफवाहों का नाम देकर पार्टी में सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहे थे. 

नेता प्रतिपक्ष नहीं रहना चाहते थे अजित पवार 

यहां तक की अजित पवार ने यह तक कहा था कि वह अंतिम दम तक एनसीपी का साथ नहीं छोड़ेंगे. खैर यह तो साफ है कि अजित का यह फैसला जल्दबाजी में लिया हुआ फैसला नहीं है. उन्हें लंबे समय से ही एनसीपी में सियासत के मामले में अलग-थलग होता हुआ देखा जा रहा था. हाल ही में उन्होंने पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष पद की मांग भी उठाई थी. उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि नेता प्रतिपक्ष नहीं रहना है. 

राष्ट्रीय टीम में अजित पवार को नहीं मिली जगह

एनसीपी चीफ शरद पवार ने पिछले महीने जून में बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी की कमान अपनी बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल के हाथों में सौंप दी थी. दोनों को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. इस फैसले को अजित पवार के लिए झटके की तरह देखा गया था. तब भी उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात की खुशी है. हालांकि, एक समय तक उन्हें पार्टी अध्यक्ष का दावेदार माना जा रहा था.

बीजेपी में शामिल होने की पहले से चर्चा 

अजित पवार के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा जोरों पर थीं. माना जा रहा था कि बीजेपी के साथ संपर्क में हैं इतना ही नहीं उनकी गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की बात सामने आई थी. अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा ईडी की जांच के दायरे में भी थे. पीएम मोदी ने भी अपने के भाषण में एनसीपी पर आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र स्टेट सहकारी घोटाले और सिंचाई घोटाले का जिक्र किया था. इन्हीं घोटालों में अजित पवार का नाम भी शामिल था. इन्हीं सब मनमुटाव और ईडी के डर से उनका एनसीपी में वापस जाना नामुमकिन लग रहा है.  

ये भी पढ़ें: 

Maharashtra NCP Crisis: लोकसभा चुनाव से पहले मोदी और शाह को महाराष्ट्र से कैसे मिली बड़ी राहत? अजित पवार बने बड़ी वजह


Nilesh Desai
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