दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का जल्द एलान हो जाएगा और आचार संहिता लग जाएगी. उसके पहले जहां एक तरफ जनता को लुभाने के लिए सभी पार्टियों की तरफ से वादे और दावे किए जा रहे हैं तो वहीं एक दूसरे को घेरने से भी कोई पार्टी नहीं चूक रही है. दिल्ली के सियासी मैदान में तीन प्रमुख पार्टियां मैदान में मुख्यतौर से दिख रही है, वे हैं- बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस. ऐसे में दिल्ली चुनाव में जनता के किए जा रहे लुकलुभावने वादे और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच बीजेपी दिल्ली के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा के साथ एबीपी लाइव टीम से राजेश कुमार ने बातचीत की. आइये जानते हैं कपिल मिश्रा ने दिल्ली चुनाव को लेकर क्या कुछ कहा:
सवाल1- दिल्ली चुनाव को लेकर इस वक्त ऐसे कई मुद्दे उठ रहे हैं, जिनमें सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की तरफ से पुजारियों-ग्रंथियों और इमामों को वेतन देने का वादा किया गया है. आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: देखिए, दो चीजें इसमें बड़ी साफ है. इमामों को दिल्ली में पहले से वेतन दिया जा रहा है. पुजारी और ग्रंथी कोई इमाम से छोटी चीज नहीं है. जिस दिन से इमामों को वेतन दिया गया, उसी दिन से पुजारियों-ग्रंथियों को वेतन देने की घोषणा ना करना ये बताता है कि ‘AAP’ के मन में भेद-भाव था. एक तरह से AAP ने पुजारियों-ग्रंथियों को इमामों से छोटा समझा. आज जब ये संभावना नज़र आयी कि हिंदू नहीं बटेंगे, तब केजरीवाल नई-नई स्कीम घोषित कर रहे हैं. सरकार किसी स्कीम का एलान कर सकती है, लेकिन उनसे उस स्कीम को लागू भी करना होता है.
अरविंद केजरीवाल यह नहीं कह सकते जब हमारी सरकार आएगी उसके बाद हम पुजारियों और ग्रंथियों को पैसा देंगे. दिल्ली में आम आदमी पार्टी कि सरकार तो आज भी है, आज दे दीजिए. जिस तारीख से इमामों को वेतन मिल रहा था, उसी तारीख से 10 साल पहले से पुजारियों-ग्रंथियों को 18 हजार वादे वाला वेतन मिलना चाहिए. वेतन मिलना उनका हक है. क्योंकि अगर आप इमामों को पैसा दें और पुजारियों-ग्रंथियों को ना दें यह तो किस तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
दूसरी बात, कम से कम दो किस्तें दिल्ली के पुजारियों और ग्रंथियों के खातों में आचार संहिता लगने से पहले आ जानी चाहिए. आज भी केजरीवाल अगर ये कहेंगे कि दोबारा सरकार आएगी तो दूंगा तो फिर सवाल उठ रहा है कि आज क्यों नहीं देंगे, इमामों को तो पिछले 10 साल से देते आए हैं.
मुझे ऐसा लगता है कि जब हिंदू एकता से आम आदमी पार्टी डर गई तो इन्हें पुजारी और ग्रंथियों की याद आ गई है, जो एक छलावा है. अगर इस योजना में थोड़ी सी भी विश्वसनीयता होती, तो यह राशि इन लोगों के खातों में आ रहा होती. सरकार आज भी अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी) की है. उसके लिए उन्हें किसी की प्रतीक्षा नहीं करनी है कि कल सरकार आएगी तो पैसा देंगे.
तीसरी बात, पुजारी और गंथी तो पंजाब में भी हैं. वहां कोई मोदी, कोई एलजी नहीं रोक रहा है. आप पंजाब के पुजारियों-ग्रंथियों, महिलाओं को उनके खातों में पैसा देना शुरू कीजिए. कहीं से कुछ तो करके दिखाइए. सिर्फ चुनाव सिर पर आ गया और हार सामने दिखाई दे रही है, हिन्दुओं की एकता दिख रही है, तो ऐसे में ऐसा कोई घोषणा कर दो! उससे तो काम नहीं चलेगा. इस पर कोई भरोसा नहीं कर सकता है.
सवाल2- चुनाव से पहले कई स्कीम्स की इस वक्त बाढ़ लगी है, जैसे- महिलाओं को 2100 रुपये देने की बातें की जा रही है, ऑटो चालकों के लिए अलग से स्कीम का एलान किया जा रहा है. ऐसे में जब एक-एक कर लोकलुभावने वायदे किए जा रहे हैं, उसे आप किस तरह से देखते हैं?
जवाब-
‘जब चादर लगी फटने तो घोषणाएं लगी बटने’
जब सामने हार दिखने लगी तो AAP को दिल्ली की महिलाएं और ऑटो चालकों की याद आ रही है. यही आटो ड्राइवर ने सबसे पहले आम आदमी पार्टी की टोपी पहनी. अरविंद केजरीवाल को सीएम बनाने के लिए किसी एक वर्ग ने सबसे ज्यादा मेहनत की उसमें दिल्ली के ऑटो वाले थे. ऑटो चालकों को 10 साल में क्या मिला? 10 सालों में ऑटो चालकों की जिंदगी तो वहीं कि वहीं हैं. अब जब AAP को सामने से हार दिख रही है, तो वे ऑटो वालों को बुलवाकर घोषणाएं कर रहे हो. 10 साल जिसकी सरकार हो, वह घोषणा नहीं करता, वो रिपोर्ट कार्ड देता है.
सवाल यहां ये उठता है कि आपने 10 साल ऑटो वालों के लिए क्या किया? आपने 10 साल महिलाओं के लिए क्या किया? पुजारियों-ग्रंथियों के लिए 10 सालों में क्या किया? रिपोर्ट कार्ड पेश कीजिए. ये कहना कि अभी सरकार आएगी तब करेंगे, ये जायज नहीं है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी कि सरकार आज भी है और आपकी पार्टी की मुख्यमंत्री हैं. मुझे लगता है कि आज अगर सबसे ज्यादा आक्रोश किसी वर्ग में है तो उस वर्ग में ऑटो वाले और महिलाएं हैं. इनके साथ धोखा किया गया है. इस प्रकार का कोई चुनावी वादा उस घाव के ऊपर मरहम नहीं लगा सकता. जो घाव लोगों के मन में लगा. कोई ऐसी घोषणा करने से कोई फर्क नहीं पड़ता.
दिल्ली कि महिलाओं की बात करें तो लोकसभा चुनाव से पहले ऐसे ही उनसे हजार-हजार रुपये के फॉर्म भरवाए गए थे. लेकिन किसी के खाते में एक रुपया नहीं आया. पंजाब में साढ़े तीन साल पहले ऐसे ही फॉर्म भरवाए गए थे. साढ़े तीन साल हो गए लेकिन पंजाब में आज तक किसी के खाते में एक रुपया नहीं आया. पंजाब कि महिलाएं पूछ रहीं हैं उनको अभी तक पैसा क्यों नहीं नहीं मिल.
दिल्ली में फिर से फॉर्म भरवाया जा रहा है. एक ऐप बनाकर, उसमें लोगों की बैंक डिटेल्स मांगी जा रही है. व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा रही है, ओटीपी मांगा जा रहा है. ये सब तो एक तरह से फाइनेंशियल फ्रॉड है.
जब अभी तक इस बारे में सरकारी योजना लॉन्च नहीं हुई है, किसी प्रकार कि कोई सूचना नहीं है तो यह किस तरह का फॉर्म भरवाया जा रहा है. हमारे पास ऐसे 300 मामले आए है जिनमें ओटीपी ले लिया गया है. उसके बाद उनके खातों में से पैसे निकल गए. इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इसके चलते दिल्ली के एलजी ने जांच के आदेश दिए हैं कि इस प्रकार का फ्रॉड नहीं होना चाहिए.
सवाल3- आम आदमी पार्टी लगातार इस बात को लेकर हमले कर रही है कि बीजेपी के पास आज भी दिल्ली में कोई मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है. उनके इस आरोप पर आपका क्या कहना है?
जवाब: आम आदमी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा कौन है, ये मैं आपको माध्यम से पूछना चाहता हूं. अरविंद केजरीवाल तो खुद सीएम नहीं बन सकते हैं. उनके मुख्यमंत्री दफ्तर जाने और किसी भी फाइल को हाथ लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बैन कर रखा है. आतिशी मार्लेना दिल्ली में टेम्परेरी मुख्यमंत्री हैं, ये बात अरविंद केजरीवाल कह चुके हैं. ऐसे में आज आम आदमी पार्टी के कोई मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है. साथ ही, अरविंद केजरीवाल का ये कहना है कि वे मुख्यमंत्री बनेंगे, यह सफेद झूठ है.
भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो जहां पर पहले से मुख्यमंत्री नहीं होता, बीजेपी वहां चेहरा लेकर मैदान में नहीं उतरती हैं. राजस्थान का उदाहरण सबके सामने है. मध्य प्रदेश में भी विधायक दल ने मुख्यमंत्री चुना. हरियाणा का उदाहरण भी सबके सामने है.
आज की तारीख में लोग दिल्ली के अंदर आम आदमी पार्टी से त्रस्त हैं. लोग ये कह रहे हैं दिल्ली कि सड़कें अच्छी होनी चाहिए, पानी साफ होना चाहिए, बिजली ठीक होनी चाहिए. इसलिए, इस वक्त ये लोगों के लिए हिसाब-किताब का समय हैं. जो चुना हुआ विधायक दल होगा, वो किसी एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री चुनेगा. ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा जो प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल के साथ तालमेल करके दिल्ली को वापस पटरी पर ला सके.
सवाल4- आप बेहद करीब से दिल्ली को जानते हैं. आप क्या मानते हैं कि अगर दिल्ली की सत्ता में बीजेपी आएगी तो उसके लिए क्या कुछ प्राथमिकताएं रहने वाली है?
जवाब: बीजेपी का अभी घोषणा पत्र दिल्ली चुनाव को लेकर आना बाकी है. अगर बीजेपी दिल्ली की सत्ता में आयी तो तीन चार चीजें उनकी प्राथमिकता में रहने वाली है. इसके बारे आपको यहां पर डिटेल्स में बताते हैं. पहली बात तो ये कि दिल्ली को बेसिक फीलिंग की जरुरत है, जैसे- टूटी हुईं सड़कों की मरम्मत हो, लोगों के घरों में साफ पानी आना चाहिए, यमुना का पानी साफ होना चाहिए ताकि लोग छठ यमुना किनारे जाकर के कर पाएं. साथ ही, हवा साफ होनी चाहिए.
इसके अलावा, पिछली सरकार कि जो भी योजनाएं हैं, जो ठीक से लागू नहीं हो पाई, वो चाहे फ्री पानी, बिजली या फिर डीटीसी की बात हो… इन सभी को बीजेपी सत्ता में आने पर ठीक से लागू करेगी, ये हमारा संकल्प है. साथ ही, बीजेपी की पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान योजना लागू होगी. लाडली जैसी एक योजना दिल्ली में हो, इस पर भी बीजेपी विचार कर रही है. ये योजना मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में लागू है.
जो अस्थायी नियुक्ति वाले कर्मचारी हैं, जिनको स्थायी करने की बात हुई थी, बस मार्शल है, डीडटीसी है… इनके बारे में एक समुचित निर्णय लिया जाएगा. आंगनवाड़ी महिलाओं को लेकर लिया जाए. साथ ही, जहां पर झुग्गी वहीं मकान की जो बात है, उस पर फैसला लेने की भी जरूरत है, जिस पर बीजेपी की चुनी सरकार फैसला लेगी.