कर्नाटक में महात्मा गांधी को लेकर हाल ही में छपे विज्ञापन पर बवाल मचा हुआ है. इस बवाल में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों मुख्य रूप से आमने-सामने हैं. कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को राज्य के प्रमुख कन्नड़ और अंग्रेजी अखबारों के पहले पन्ने पर महात्मा गांधी का एक विज्ञापन छपवाया था. इसमें महात्मा गांधी को सफेद कमीज और खाकी पैंट पहने संघ-अप्पा को मनरेगा को खत्म करने के लिए फटकार लगाते हुए दिखाया गया था.
कांग्रेस सरकार का यह ऐड महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB – G RAM G) लाने के लिए केंद्र सरकार पर कटाक्ष करता था. जिसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी महात्मा गांधी से जुड़ा एक विज्ञापन अखबार में छपवा दिया.
कांग्रेस के विज्ञापन वॉर का भाजपा ने दिया जवाब
कांग्रेस के विज्ञापन के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार (7 फरवरी, 2026) को अखबार में पूरे एक पन्ने का विज्ञापन छपवाया. इसमें महात्मा गांधी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को मारने के लिए अपनी छड़ी उठाते दिखाया गया था.
The Bharatiya Janata Party (BJP), in an commercial launched by the occasion, has proven grave disrespect to the Mahatma Gandhi.
Portraying Mahatma Gandhi as somebody wielding a stick and beating others is totally opposite to the trail of non-violence he stood for. Such a… pic.twitter.com/DwQ020jlTC
— Kr!§hhh_ಚೇ 👑 (@ITSCK47) February 6, 2026
BJP के इस ऐड में महात्मा गांधी को तीनों नेताओं से यह कहते हुए दिखाया गया था, ‘तुम तीन नुंगप्पा (सब कुछ गंवा देने वाला), जो महात्मा गांधी को अपनी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हो.’ वहीं, सिद्धारमैया, राहुल और खरगे को महात्मा गांधी से उन्हें न मारने की गुहार लगाते दिखाया गया था.
महात्मा गांधी से जुड़े विज्ञापन वॉर की KGSN ने की निंदा
राज्य में हाल ही में अखबारों में छपे महात्मा गांधी से जुड़े विज्ञापनों की कर्नाटक गांधी स्मारक निधि (KGSN) ने निंदा की है. संस्था ने इस महात्मा गांधी की तस्वीर का कथित गलत इस्तेमाल बताया है. केजीएसएन के अध्यक्ष वुडे पी. कृष्णा और मानद सचिव एमसी नरेंद्र ने एक बयान जारी कर इसे महात्मा गांधी के मूल आदर्शों का अपमान और गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय करार दिया है.
