तेलंगाना में बुधवार (11 फरवरी, 2026) को नगर निगम चुनाव के दौरान निजामाबाद के एक मतदान केंद्र पर जब पुलिस और पोलिंग स्टाफ अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, तब भाजपा सांसद धर्मपुरी अरविंद का गुस्सा देखने लायक था. भारी भीड़ और तनाव के माहौल के बीच सांसद ने मौके पर मौजूद अधिकारियों पर जमकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. उन्हें देखकर ऐसा लगा रहा था जैसे वे अपनी पार्टी के एजेंटों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.
उन्होंने पुलिसकर्मियों को सीधे तौर पर ‘Useless Fellows’ (बेकार लोग) कहकर तक संबोधित किया और गुस्से में पूछा, ‘क्या पुलिस वालों की आंखें सिर पर चढ़ गई हैं?’ दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब पुलिस ने मतदान केंद्र के अंदर किसी व्यक्ति को रोकने की कोशिश की.
लोगों ने घटना के फोटो और वीडियो किए वायरल
इस घटना को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ है, जिसमें यह साफ देखा जा सकता है कि कैसे सांसद अपने आप को नियंत्रित नहीं कर पा रहे थे. उन्होंने पोलिंग स्टाफ की मौजूदगी में ही धमकी दी कि अगर कोई पुलिस वाला या अधिकारी मेरे लोगों को बूथ से बाहर भेजता है, तो उन्हें खींचकर बाहर निकालो.
U want gutsy chief like @Arvindharmapuri to face up in opposition to Ruling get together’s bullying ways. I m certain he delivered Nizamabad Municipal Corporation with comfy majority. pic.twitter.com/OeZ2s9iRgD
— Unicorn Royal (@iconoclast175) February 11, 2026
पोलिंग बूथ पर मौजूद वोटरों ने इस घटना की तस्वीरें और वीडियो को शेयर किया है, जिसमें अरविंद का आक्रामक रुख साफ झलक रहा है. वे अधिकारियों पर इतना भड़क गए कि उन्हें गालियां देने से भी गुरेज नहीं किया.
पहले भी विवादों में घिरे रहे हैं सांसद धर्मपुरी अरविंद
हालांकि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब धर्मपुरी अरविंद विवादों में घिरे हैं. तेलंगाना की राजनीति में वे अपने आक्रामक और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. पिछले चुनावों के दौरान भी उन पर प्रशासनिक अमले को धमकाने के आरोप लगते रहे हैं. निजामाबाद उनकी अपनी सीट होने के नाते, वे हमेशा यहां अपनी दबदबा कायम रखना चाहते हैं, लेकिन इस बार उनका यह गुंडागर्डी भरा रवैया उन पर ही भारी पड़ता दिख रहा है. यह घटना तब हुई जब तेलंगाना नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान जोरों पर था और हर दल अपनी जीत सुनिश्चित करने में जुटा था.
चुनाव के दौरान प्रशासन का अपमान व्यवस्था को देता है चुनौती
एक जनप्रतिनिधि का यह बर्ताव लोकतंत्र के लिए कतई शोभनीय नहीं है. चुनाव आयोग के नियमों का पालन कराने वाले पुलिसकर्मियों को इस तरह धमकी देना और उनका अपमान करना सीधे-सीधे व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या राजनीतिक पावर का इस्तेमाल अधिकारियों को डराने के लिए किया जाना चाहिए?
