1999 Storm tree collapse Political Impact Temple and Congress roots Indira Gandhi Sonia Gandhi

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1999 Political Storm: कांग्रेस पार्टी कुछ ही दिनों में अपने नए मुख्यालय में शिफ्ट होने जा रही है. 24 अकबर रोड से बदलकर पार्टी का मुख्यालय अब 9A कोटला मार्ग पर स्थित “इंदिरा भवन” में होगा. भूमिगत सुविधाओं समेत सात मंजिला इस आधुनिक इमारत का निर्माण 2016 में शुरू हुआ था और अब ये पूरी तरह तैयार है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अगले डेढ़ महीने के अंदर शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. हालांकि मुख्यालय को पहले ही ट्रांसफर किया जाना था, लेकिन अलग-अलग कारणों की वजह से ये प्रक्रिया लगातार टलती रही. 

इसी बीच कांग्रेस मुख्यालय से जुड़ा एक पुराना किस्सा फिर से चर्चा में आ गया है. 1999 के मई महीने में एक तूफान ने दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक बड़ा पेड़ गिरा दिया था. इस हादसे में एक 8 साल के बच्चे की जान चली गई और दफ्तर के अंदर स्थित एक अस्थायी मंदिर भी नष्ट हो गया था. ये पेड़ और मंदिर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और टिकट के इच्छुक लोगों के लिए एक खास प्रतीक बन गए थे. कई लोग यहां आकर अपनी राजनीतिक इच्छाओं की कामना करते थे. ये पेड़ 1978 में कांग्रेस दफ्तर के इस जगह पर ट्रांसफर होने के बाद से यहां था और जानकारी के अनुसार इस मंदिर को एक संत ने बनवाया था. 

सोनिया गांधी ने था उठाया सवाल

द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ये पेड़ और मंदिर कांग्रेस के दफ्तर में एक प्रतीक के रूप में थे जहां राजनेता अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा अर्चना करते थे. 1999 में इस पेड़ का गिरना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि लोगों का मानना है कि इसके साथ जुड़ी भावनाएं और विश्वास बहुत गहरे थे. ऐसे में पेड़ का गिरना कुछ कार्यकर्ताओं के लिए इस बात का प्रतीक बन गया कि पार्टी की जड़ें अब कमजोर हो चुकी हैं.

पेड़ गिरने और मंदिर के नष्ट होने की खबर जब सोनिया गांधी तक पहुंची तो उन्होंने ये जानने की इच्छा जताई कि इतना मजबूत दिखाई देने वाला एक पुराना पेड़ तूफान में कैसे गिर गई. इस पर पार्टी के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पेड़ की जड़ें पहले से कमजोर हो चुकी थीं. इस घटना ने पार्टी के अंदर असंतोष और चिंताओं को जन्म दिया था. कुछ पार्टी के नेताओं ने इस घटना को पार्टी के भविष्य से जोड़ते हुए ये भी कहा कि पार्टी की जड़ें भी अब कमजोर हो गई हैं. 

1978 में कांग्रेस कार्यालय का विवादास्पद बदलाव

हालांकि 24 अकबर रोड और कांग्रेस पार्टी के लिए ये एक कठिन समय था, लेकिन कांग्रेस ने आलोचकों को गलत साबित कर दिया, जब 2004 और 2009 में उन्होंने दो शानदार चुनावी जीते हासिल की. इन बड़ी जीत ने कांग्रेस के अस्तित्व को मजबूत किया और ये साबित किया कि पार्टी के अंदर राजनीतिक संरचना और समर्थन में कोई कमी नहीं आई थी.

कांग्रेस पार्टी का ये प्रमुख कार्यालय 1978 में एक विवादास्पद समय में आया. जब कांग्रेस के अंदर इंदिरा गांधी के खिलाफ पार्टी के नेताओं ने विद्रोह किया, तब कांग्रेस कार्यालय के स्थान में भी बदलाव किया गया. इंदिरा गांधी के निष्कासन के बाद पार्टी के अंदर सशक्त नेताओं का समर्थन उन्हें मिला और इंदिरा गांधी को पार्टी में फिर से प्रवेश दिया गया. इस घटना से ये स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस की राजनीति में कई मोड़ आते रहते हैं और कभी भी पार्टी के अंदर बदलाव हो सकता है.

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