<p model="text-align: justify;">सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 फरवरी) को कोस्ट गार्ड में महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने के मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने केंद्र से सवाल किया कि कोस्ट कार्ड को लेकर आपका रवैया इतना उदासीन क्यों है? कोस्ट गार्ड में महिलाओं का कमीशन क्यों नहीं चाहते? बेंच ने कहा, अगर महिलाएं सीमाओं की रक्षा कर सकती हैं, तो वे तटों की भी रक्षा कर सकती हैं. आप ‘नारी शक्ति’ की बात करते हैं. अब इसे यहां दिखाएं.<br /> <br />सुप्रीम कोर्ट सोमवार को वूमन कोस्ट गार्ड शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी प्रियंका त्यागी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. इस दौरान सीजेआई ने केंद्र से कहा, ”आप (केंद्र) नारी शक्ति, नारी शक्ति की बात करते हैं, अब इसे यहां दिखाएं.” कोर्ट ने कहा, जब तीनों सशस्त्र बलों- सेना, वायुसेना और नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद आप इतने पितृसत्तात्मक क्यों हैं कि आप महिलाओं को तटरक्षक क्षेत्र में नहीं देखना चाहते? तटरक्षक बल के प्रति आपका उदासीन रवैया क्यों है."</p>
<p model="text-align: justify;"><robust>महिलाएं तटों की भी रक्षा कर सकती हैं- SC</robust></p>
<p model="text-align: justify;">बेंच में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल थे. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने बेंच के सामने कहा कि तटरक्षक बल सेना और नौसेना की तुलना में एक अलग डोमेन में काम करता है. सुप्रीम कोर्ट ने कानून अधिकारी से तीनों रक्षा सेवाओं में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने वाले फैसले का अध्ययन करने को कहा. कोर्ट ने कहा, वे दिन गए जब कहा जाता था कि महिलाएं तटरक्षक बल में नहीं हो सकतीं. अगर महिलाएं सीमाओं की रक्षा कर सकती हैं, तो महिलाएं तटों की भी रक्षा कर सकती हैं. </p>
<p model="text-align: justify;">सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के बबीता पुनिया फैसले का भी जिक्र किया. सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के फैसले में कहा था कि सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए. तब कोर्ट ने सरकार के ”शारीरिक सीमाओं और सामाजिक मानदंडों” के तर्क को खारिज कर दिया था.</p>

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