सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 पर सुनवाई टली, सीजेआई ने दोबारा याचिका दायर करने को कहा

    0
    47

    ख़बर सुनें

    खास बातें

    • सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील एम एल शर्मा से कहा यह किस तरह की याचिका है? 
    • सीजेआई ने कहा कि यह याचिका पढ़ने में 30 मिनट लगाए लेकिन इसका कोई मतलब नहीं पता चल सका।
    • हम जम्मू कश्मीर में मीडिया पर लगी पाबंदियां हटाने के मुद्दे पर थोड़ा और वक्त देना चाहेंगे : उच्चतम न्यायालय ।
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद 370 से संबंधित सभी याचिकाओं को एक साथ सुना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अनुच्छेद 370 पर सुनवाई हुई है। इस दौरान कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा है कि याचिका को दोबारा दायर किया जाए।

    विज्ञापन

    दरअसल आज कोर्ट ने इस मामले पर दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई की गई। जिसमें से पहली याचिका में अनुच्छेद 370 तो हटाए जाने का विरोध किया गया है। वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों से सरकार का नियंत्रण हटाने की मांग की गई है।

    जो पहली याचिका है, उसे वकील एमएल शर्मा ने दायर किया है। जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 को हटाकर सरकार ने मनमानी की है। उसने इसके लिए संसदीय रास्ता नहीं अपनाया है। इस याचिका में राष्ट्रपति के आदेश को भी असंवैधानिक बताया गया है।

    शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए गोगोई ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि ये किस तरह की याचिका है। मुझे समझ ही नहीं आ रही है। उन्होंने फिर पूछा कि याचिकाकर्ता कैसी राहत चाहते हैं।

    संपादक अनुराधा भसीन की याचिका

    वहीं दूसरी याचिका को कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन ने दायर किया है। जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पत्रकारों पर लगाए गए नियंत्रण खत्म किए जाएं। इससे पहले दाखिल एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर का मामला संवेदनशील है। इसपर केंद्र सरकार को थोड़ा वक्त देना होगा।

    बता दें केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को जब ये फैसला लिया और जिस तरह दोनों सदनों में बिल पास हुआ। तभी से उसपर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी पार्टियों ने इस बिल और फैसले को गैर संवैधानिक बताया है। इन पार्टियों ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में ये बिल आदेश नहीं टिकेगा। हालांकि कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि ये फैसला और इसे लागू करने की प्रक्रिया संवैधानिक है।

    गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में धारा 144 को लागू है। जिसके चलते सभी स्कूल और कॉलेज के अलावा मोबाइल इंटरनेट, मोबाइल कॉलिंग बंद हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अबदुल्ला, सज्जाद लोन सहित कई नेताओं को नजरबंद भी किया गया है। 

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here