‘दीदी के बोलो’ कार्यक्रम में लोगों के सवालों से छूट रहे हैं तृणमूल नेताओं के पसीने

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    अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Updated Mon, 12 Aug 2019 02:01 AM IST

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    • इन सवालों का जवाब देने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है
    • नेता अगले सौ दिनों के दौरान 10 हजार गांवों का दौरा कर लोगों के साथ समय बिताएंगे और उनका दुख-दर्द सुनेंगे
    • स्थानीय नेतृत्व के अक्खड़पन से संबंधित आम लोगों के सवालों का जवाब देने में उनके पसीने छूट रहे हैं

    पश्चिम बंगाल में ‘दीदी के बोलो’ कार्यक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान के तहत पार्टी के नेता और मंत्री गांवों में जा तो रहे हैं, लेकिन कटमनी और स्थानीय नेतृत्व के अक्खड़पन से संबंधित आम लोगों के सवालों का जवाब देने में उनके पसीने छूट रहे हैं।

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    चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ओर से तय रणनीति के तहत पार्टी के एक हजार नेता अगले सौ दिनों के दौरान 10 हजार गांवों का दौरा कर लोगों के साथ समय बिताएंगे और उनका दुख-दर्द सुनेंगे। लेकिन इस कवायद से तृणमूल नेताओं के पसीने छूट रहे हैं। 

    तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस अभियान से कुछ लोग तो खुश हैं। लेकिन कई लोग कटमनी, स्थानीय नेताओं के अक्खड़ रवैये, दुर्व्यवहार और उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर सवाल पूछ कर मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। इन सवालों का जवाब देने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। 

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