Zee Jankari: कठुआ रेप केस मामले में SIT के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश

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SIT में शामिल जिन पुलिसकर्मियों ने इस मामले की जांच की थी उनके नाम हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच के पूर्व SSP आरके जल्ला…आरके जल्ला अब रिटायर हो चुके हैं. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच के Additional superintendent पीरज़ादा नावेद भी SIT का हिस्सा थे. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की Deputy SP…श्वेतांबरी शर्मा क्राइम ब्रांच के Deputy SP….नासीर हुसैन जम्मू पुलिस की क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर…उर्फान वानी. और क्राइम ब्रांच के केवल किशोर के खिलाफ भी FIR जर्ज करने के आदेश दिए गए हैं.

सचिन शर्मा, नीरज शर्मा और साहिल शर्मा ने इन्हीं 6 पुलिस कर्मियों पर विशाल जंगोत्रा के खिलाफ जबरदस्ती बयान दिलवाए जाने के आरोप लगाए हैं. मेरे हाथ में इस वक्त जम्मू की अदालत के आदेश की एक Copy है. जिसमें से मैं आपको कुछ लाइनें पढ़कर सुनाना चाहता हूं . आदेश में कहा गया है कि याचिकाकर्ता चाहते हैं कि SIT के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए.

इसका आधार याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए वो आरोप हैं जिसके मुताबिक SIT में शामिल रहे सभी लोगों ने इन्हें डराया, धमकाया और विशाल के खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर किया. इस आदेश में पठानकोट के स्पेशल कोर्ट के फैसले का भी जिक्र है. जिसके आधार पर याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अदालत द्वारा विशाल जंगोत्रा को बरी किया जाना.

इस बात का सबूत है कि इन लोगों को जानबूझकर टॉर्चर किया गया और इनसे विशाल के खिलाफ बयान दिलवाए गए. ये सब एक बड़ी साजिश के तहत किया गया जिसके सूत्रधार SIT में शामिल ये 6 पुलिसकर्मी थे.सचिन, नीरज और साहिल ने पहले जम्मू के पक्का डंगा इलाके के SHO से SIT के सदस्यों खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील की थी.

लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसके बाद इन्होंने अपनी याचिका को जम्मू के SSP को भेजा, लेकिन उनकी तरफ से भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. जिसके बाद इन तीनों ने अदालत में कठुआ केस की SIT के खिलाफ याचिका दायर की.

अब आप सोचिए जिस मामले की जांच एक SIT कर रही थी उसी SIT के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने का आदेश हमें क्या बताता है ? क्या सबूतों से छेड़छाड़ करके इस पूरे मामले को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी ? क्या इस मामले में झूठे सबूत गढ़ने के लिए पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव डाला जा रहा था ?

इस मामले में हमने याचिकाकर्ताओं के वकील अंकुर शर्मा से भी बात की. अंकुर शर्मा का कहना है कि पुलिस ने इन तीनों को हिरासत के दौरान टॉर्चर किया . इनके परिवारों को खत्म करने की धमकी दी गई और फिर CRPC की धारा 161 के तहत इनसे विशाल जंगोत्रा के खिलाफ बयान लिए गए.

आप इन छात्रों के वकील का ये बयान सुनिए फिर हम आपको ये बताएंगे कि कैसे ये पूरा मामला देश की मीडिया ने एक एजेंडे के तहत कवर किया. सच दिखाने के लिए Zee News की आलोचना की गई .हमारे Reporters को डराया और धमकाया गया और पूरे देश में ऐसा माहौल बनाया गया जैसे सच की बात करना कोई अपराध हो.

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