ZEE जानकारी: 8 करोड़ में सिर्फ 17 लोग निकले गरीब, जानिए चीन ने कैसे हटाई गरीबी?

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चीन में एक कहावत है कि आपने किसी आदमी को एक मछली दे दी, तो एक दिन के लिए उसका पेट भर जाएगा. लेकिन, अगर उस आदमी को आपने मछली पकड़ना सिखा दिया तो जीवन भर के लिए उसका पेट भर जाएगा . ये कहावत इस बात का सबूत है कि चीन के लोग किसी भी समस्या के स्थायी इलाज में यकीन रखते हैं. शायद यही वजह है कि गरीबी के खिलाफ चीन से, चौंकाने वाले आंकड़े आए हैं. दावा किया गया है कि…8 करोड़ की आबादी वाले चीन के प्रांत जियांग-सू (Jiangsu) में केवल 17 लोग गरीब हैं . वहां के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जियांग-सू में गरीबों की संख्या 2 करोड़ 54 लाख थी, जिनमें से 99.9% आबादी को गरीबी से निकाल लिया गया है .

आप इन आंकड़ों की अहमियत तब बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, जब हम इनकी तुलना भारत से करेंगे .चीन के जियांग-सू (Jiangsu) प्रांत की आबादी करीब-करीब उतनी ही है, जितनी भारत के मध्य प्रदेश की जनसंख्या है . करीब साढ़े 7 करोड़ की आबादी वाले मध्य प्रदेश में करीब ढाई करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन गुज़ार रहे हैं . इसी तरह 6 करोड़ 90 लाख की आबादी वाले गुजरात में…करीब डेढ़ करोड़ आबादी गरीबी रेखा से नीचे है .

हमारे देश में गरीबी… भाषण, नारा, सेमिनार, निबंध और राजनीति के लिए एक प्रिय विषय बनकर रह गई . वर्ष 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने एक नारा दिया… गरीबी हटाओ . इस नारे के बाद इंदिरा गांधी गरीबों की मसीहा बन गईं . इस नारे के दम पर इंदिरा गांधी को बहुत बड़ी जीत मिली . लेकिन इसके बाद भी गरीबी नहीं मिटी …और गरीबी का मज़ाक भी उड़ाया गया .

UPA के शासन में कहा गया था कि प्रति दिन 27 रुपये से ज्यादा खर्च करने वालों को गरीब नहीं माना जाएगा और कांग्रेस के नेता इस आंकड़े को सही ठहराने में लगे हुए थे. कांग्रेस के एक नेता ने …ये भी कहा था कि गरीबी State Of Mind …यानी एक मानसिक स्थिति है . संयुक्त राष्ट्र के Food and Agriculture Organization के मुताबिक भारत में 19 करोड़ 44 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें दोनों वक्त का भोजन नहीं मिलता…और इनमें से ज्यादातर को भूखे पेट सोना पड़ता है . क्या ऐसे लोगों के पास जाकर आप कह सकते हैं कि….गरीबी कहीं नहीं है, ये तो बस एक मानसिक स्थिति है .विश्व बैंक ऐसे लोगों को गरीब की श्रेणी में रखता है, जिनकी कमाई प्रतिदिन 134 रुपये या इससे कम होती है .

वर्ष 2011 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रतिदिन 27 रुपये आमदनी वाले व्यक्ति को गरीब माना गया था .और उसी वर्ष चीन ने… अपने देश में रोज़ाना 135 रुपये कमाने वालों को गरीब माना था .इन आंकड़ों से पता चलता है कि चीन के गरीब…हमारे देश के गरीबों के मुकाबले …बहुत अमीर हैं .

चीन के कई प्रांतों ने गरीबी को खत्म करके, समृद्धि की नई परिभाषा लिखी है .आगे आपको बताएंगे कि चीन ने गरीबी को हटाने में कैसे सफलता पाई . लेकिन, उससे पहले हम आपको चीन के एक ऐसे गांव में ले चलेंगे, जहां के लोगों की सालाना आय करीब 88 लाख रुपये है…यानी रोज़ाना 24 हज़ार रुपये से भी ज्यादा . क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि भारत के गांवों में Five Star होटल हों ? चीन में ऐसा ही एक गांव है, जिसकी गिनती दुनिया के सबसे अमीर गांवों में होती है . ये गांव भी चीन के जियांग-सू (Jiangsu) प्रांत में ही है, जिसका हमने ऊपर जिक्र किया .

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 1990 में चीन के 75 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे थे . यानी वो आधिकारिक तौर पर गरीब थे . लेकिन, पिछले चार दशक में वहां के 80 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल आए हैं . ये आबादी जर्मनी, रशिया और अमेरिका की कुल जनसंख्या के बराबर है .

सवाल उठता है कि चीन ने गरीबी हटाने के लिए क्या किया ?

इसके जवाब में 3 प्रमुख बातें कहीं जाती हैं.

पहली बात- चीन में गरीबों को खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं और मकान दिए गए

दूसरी बात- दूर-दराज के इलाकों को देश से जोड़ने के काम में भारी निवेश किया गया.. यानी सड़क, रेल और Port जैसे Infrastructure Projects पर जोर दिया गया.

और तीसरी बात- वर्ष 2017 तक चीन में 7 लाख 75 हज़ार सरकारी अधिकारियों को गांवों की स्थिति बेहतर बनाने के लिए भेजा गया.

देखा जाए तो इनमें से कोई भी काम विशेष नहीं है . लेकिन, किसी भी काम को विशेष बनाने के लिए मज़बूत इच्छाशक्ति की ज़रूरत पड़ती है . चीन से हमें यही सीखना चाहिए.

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