ZEE जानकारी: 6-6 घंटे के 3 उपवास से आपकी ज़िंदगी बदल जाएगी!

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हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य का पहला सुख निरोगी काया है. यानी दुनिया-जहान की सुख सुविधाओं और खुशियों को आप तभी महसूस कर पाएंगे, जब आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. नए साल में 13 दिन गुज़र चुके हैं. हमें उम्मीद है कि नए साल के मौके पर आपका जश्न, दावत और खाना-पीना पूरा हो चुका होगा, इसलिए अब आपको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए. आज हम आपके लिए व्रत की ऐसी थाली लेकर आए हैं, जिसमें आपको खाने-पीने वाली चीजों की जगह, ज़िंदगी भर के लिए स्वस्थ रहने के शानदार फॉर्मूले मिलेंगे.

आज हम उपवास यानी व्रत का सामाजिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे.लेकिन पहले एक खास रिसर्च के बारे में बात करते हैं . New England Journal of Medicine में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक.इंसान दिन में 6-6 घंटों का व्रत कर के डायबिटीज़, दिल की बीमारियों और कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारीयों को भी हरा सकता है. यहां हम Intermittent Fasting यानी एक खास अंतराल पर किए गए उपवास की बात कर रहे हैं . इस रिसर्च के मुताबिक अगर आप 18 घंटे में 3 बार… 6-6 घंटे का उपवास रखते हैं यानी हर 6 घंटे के बाद ही कुछ खाते हैं .

तो यही वो व्रत है, जिसका फायदा आपके शरीर को मिलता है . इस रिसर्च के नतीजे कहते हैं कि दिन भर में 6 घंटे वाले, 3 उपवास करने से लंबे समय तक बुढ़ापे को रोका जा सकता है तनाव कम करने की क्षमता बढ़ जाती है, बीमारियों का असर कम होता है और दावा ये है कि ऐसे उपवास के जरिये कैंसर जैसी बीमारी को भी ठीक किया जा सकता है.

व्रत का अर्थ होता है संकल्प या पक्का इरादा. इसी तरह उपवास भी दो शब्दों से बना है. उप का मतलब होता है – निकट और वास का मतलब होता है- निवास . उपवास का मतलब हुआ- अपनी आत्मा के निकट निवास करना . यानी उपवास के दौरान आप. अपने मन की शक्ति के करीब होते हैं . लेकिन व्रत में, यानी कुछ घंटों तक भूखे रहने के नियम में आखिर ऐसा क्या है कि… ये दवा की तरह काम करता है. इसके लिए आपको व्रत के पीछे के विज्ञान को समझना होगा.

सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि हमारे शरीर को चलाने के लिए energy यानी ऊर्जा की जरूरत होती है . शरीर को ये ऊर्जा भोजन से बनने वाले glucose से मिलती है. खाना खाने के बाद, आपके शरीर के अंदर यही glucose बनता है…जो ईंधन का काम करता है . लेकिन बार-बार खाने की वजह से जब शरीर में glucose की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तब डायबिटीज की शुरुआत हो जाती है.

खाना खाने के बाद आपके शरीर की पाचन क्रिया दो काम करती है. जब आप भोजन करते हैं, तब ये उसे पचाने में जुट जाती है . लेकिन जब आपका पेट खाली होता है, तब यही digestive system शरीर के workshop के तौर पर काम करने लगता है . यानी जब आप व्रत करते हैं, तब ये सिस्टम आपके शरीर के कमज़ोर cells यानी कोशिकाओं की मरम्मत करता है . जिस समय आप भूखे होते हैं, उस समय आपके शरीर के अंदर तेज़ रफ्तार से maintenance यानी मरम्मत की प्रक्रिया चल रही होती है .माना जाता है कि इस दौरान बीमारी से लड़ने वाले cells काफी सक्रिय हो जाते हैं.

और ये इतने ताकतवर हो जाते हैं कि कैंसर जैसी बीमारियों के cells को भी खत्म करना शुरू कर देते हैं . आप ये सोच रहे होंगे कि भोजन के बगैर शरीर ईंधन का इंतजाम कैसे करता है. असल में हमारा शरीर भोजन के अभाव में, अपने अंदर जमा .अत्याधिक Fat को तोड़ कर Glucose बनाने लगता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि इस प्रक्रिया से शरीर में maintenance की रफतार और तेज हो जाती है.

तो क्या व्रत रखने से आपको भी फायदा होगा ?

उपवास से जुड़ी इस रिसर्च में, वैज्ञानिकों ने नतीजों तक पहुंचने से पहले चूहों पर प्रयोग किया. चूहों को दो ग्रुप मे बांटा गया. एक ग्रुप को रोज पेट भर खाना खिलाया गया और दूसरे को प्रतिदिन सिर्फ एक या दो बार ही खाना दिया गया . अलग-अलग Data के विश्लेषण से ये पता चला कि लंबे समय तक खाना ना खाने…यानी उपवास करने की वजह से चूहों की आयु 14 से 45 प्रतिशत तक बढ़ गई . एक दूसरी study में… 100 Overweight महिलाओं के दो ग्रुप बनाए गए. एक ग्रुप ने हफ्ते में 2 दिन व्रत किया जबकि दूसरे ग्रुप ने रोज़ाना अपनी calories में 25 प्रतिशत की कटौती की, यानी व्रत नहीं किया.

लेकिन खाना कम खाया…. इसके बाद दोनों ग्रुपों ने 6 महीने तक इस नियम का पालन किया . नतीजा ये हुआ कि व्रत करने वाली महिलाओं का वज़न कहीं ज्यादा घटा और उनके शरीर में natural insulin का स्तर भी बेहतर हुआ .क्या व्रत आपके लिए भी लंबी उम्र की गारंटी बन सकता है . इन सवालों के जवाब के लिए आपको अपने पूरे परिवार के साथ ये रिपोर्ट देखनी चाहिए .

उपवास आपको मानसिक रूप से मज़बूत बनाता है . भूखे रहने से इस बात का भी एहसास होता है कि भूख या प्यास क्या होती है. इससे इंसान भोजन और पानी की अहमियत समझता है . उसे भूखे और प्यासे लोगों की पीड़ा भी समझ में आती है. यही वजह है कि हमारी संस्कृति में उपवास के बाद भंडारा आयोजित करने या प्रसाद बांटने की भी परंपरा है . कुल मिलाकर उपवास से इंसान में इंसानियत का भाव बढ़ता है .

हिंदू परंपरा में व्रत का आध्यात्मिक महत्व भी बताया गया है . ऐसा माना जाता है कि व्रत रखने से मनुष्य का आत्मबल बढ़ता है…और इसके ज़रिये वो भौतिक ज़रूरतों से ऊपर उठकर, अपनी आत्मा के नज़दीक पहुंचता है . पौराणिक ग्रंथों में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब किसी ऋषि …या किसी भक्त की तपस्या के आगे देवताओं को भी झुकना पड़ा . महात्मा गांधी ने तो अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में भी उपवास को प्रमुख अस्त्र बनाया था . आज़ादी के बाद भी, कई बार अलग-अलग आंदोलनों में …अपनी मांगों को मनवाने के लिए उपवास का इस्तेमाल किया गया .

इस्लाम में उपवास को ही रोज़ा रखना बोलते हैं . रमज़ान में पूरे महीने रोज़ा रखने की परंपरा है . बौद्ध और जैन धर्म में भी व्रत की बेहद अनुशासित परंपरा है . बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग बुद्ध पूर्णिमा के महीने में पूर्णिमा के अलावा अमावस्या और चतुर्थी के दिन भी उपवास रखते हैं . इसके अलावा ईसाइयों में भी उपवास की परंपरा है . ईस्टर के पहले के 6 हफ्तों के दौरान, ईसाइयों के एक वर्ग, रोमन Catholic समुदाय के लोग कुछ खास चीजें नहीं खाते हैं …या पूरी तरह से उपवास भी रखते हैं . यानी दुनिया की अलग अलग परंपराओं में…अलग धर्मों में और देशों में व्रत का धार्मिक महत्व है .

सवाल उठता है कि उपवास को इतना महत्व क्यों दिया गया .भगवद गीता में मनुष्य के तीन व्यवहारों का वर्णन है . ये हैं -सात्विक, राजसिक और तामसिक . सात्विक आचरण में भक्ति और अनुशासन का भाव जागृत होता है . राजसिक व्यवहार में मनुष्य के मस्तिष्क पर लालसा और अति उत्साह का असर बढ़ जाता है . जबकि तामसिक आचरण से कुंठा, ईर्ष्या जैसी बुराइयां इंसान को अपने वश में कर लेती हैं .

इसीलिए गीता में कड़वा, खट्टा, तला-भुना खाने से परहेज करने को कहा गया है, क्योंकि इनसे तामसिक विचारों को बढ़ावा मिलता है . इसी तरह वैदिक उपवास में जल, फल, दूध, दही जैसे सात्विक आहार को ग्रहण करने की सलाह दी गई है …और बताया गया है कि ये शरीर से विषैले पदार्थों के त्याग में मदद करते हैं . इस प्रक्रिया को वेदों में विष-हरण कहा गया है, जिसे अंग्रेजी में Detoxification कहा जाता है . आज का Intermittent Fasting, भारत के फलाहार आधारित उपवास से काफी मिलता जुलता है.

लेकिन, भारत में मानसिक विष-हरण की परंपरा भी है. इसके लिए हिंसक और उत्तेजक विचारों से परहेज करने की आवश्यकता है .यानी आज के समय में, आपको टुकड़े टुकड़े गैंग, डिजाइनर पत्रकारों और काउच क्रांतिकारियों से भी परहेज करना पड़ेगा तभी उपवास फलदायक साबित हो सकता है. ये विडंबना है कि भारत में संपन्न लोगों ने अपने पारंपरिक दर्शन और सदाचार को छोड़ कर पश्चिम की परंपरा को फैशन बना लिया . Intermittent Fasting के नाम पर ही सही अगर भारत के लोग उपवास को फिर से अपना लें तो . व्रत भी फैशन में लौट आएगा.

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