ZEE जानकारी: नए कश्मीर ने बदलाव की शानदार सेंचुरी, अलगाववादी ताकतें क्लीन बोल्ड

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आज हम आपको जम्मू-कश्मीर के हालात की 100 प्रतिशत सही और सच्ची रिपोर्ट दिखाएंगे. कहते हैं कि डर पर विजय हासिल करने के बाद असल ज़िंदगी शुरू होती है और धारा 370 ख़त्म होने के बाद कश्मीर में बदलाव इसका सबसे बड़ा सबूत है. पिछले 100 दिनों में कश्मीर में बदलाव की नई तस्वीरें उन सभी लोगों पर करारा तमाचा है, जो अब तक डर का डर दिखाकर अपनी राजनीति की दुकान चला रहे थे. कश्मीर में राष्ट्रवाद की गूंज उन नेताओं को करारा जवाब है, जो ये धमकी दिया करते थे कि अगर कश्मीर से 370 हटा तो खून की नदियां बह जाएंगी. कश्मीर में लहराता तिरंगा उनके लिए करारा जवाब है जो ये डर दिखा रहे थे कि अगर 370 हटा तो वहां तिरंगा उठाने वाला कोई बाकी नहीं रहेगा.

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए 107 दिन हो गए हैं. आप ये भी कह सकते हैं कि नए कश्मीर ने बदलाव की शानदार सेंचुरी (Century) लगाकर अलगाववादी ताकतों को क्लीन बोल्ड कर दिया है. इसलिए आज हम डर की नहीं, बल्कि कश्मीर में डर और आतंक के अंत का विश्लेषण करेंगे. अब हम जम्मू कश्मीर में सामान्य हालात की 100 प्रतिशत सही और सच्ची रिपोर्ट दिखाएंगे जिससे आप कश्मीर पर दुष्प्रचार की Fake News फैक्ट्री के खिलाफ मुहिम छेड़ सकते हैं .

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए 107 दिन हो गए हैं और शायद आप भी ये सोच रहे होंगे कि वहां के हालात कैसे हैं ? ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हमारे देश में सबसे ज्यादा डर की राजनीति चलती है. एक बार आपने डरना शुरु कर दिया तो इससे बड़े बड़े काम कराए जा सकते हैं. डर एक बड़ा हथियार होता है जिसकी मदद से बिना धमाका किए ही लोगों के दिमाग में एक खास एजेंडा बिठा दिया जाता है. जम्मू कश्मीर के बारे में बताया गया था कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद घाटी में खून की नदियां बहेंगी और वहां कोई तिरंगा उठाने वाला बाकी नहीं रहेगा. ऐसा डर हमेशा देश को आगे बढ़ाने वाले फैसलों में देरी की वजह बनता है. इसलिए आज हम डर की नहीं, बल्कि कश्मीर से आई अच्छी खबरों की बात करेंगे. 

पिछले 107 दिनो में जम्मू कश्मीर के बारे में कई भ्रामक खबरें फैलाई गईं. ये कहा गया कि कश्मीर की सड़कों पर कर्फ्यू लगा हुआ है लेकिन आप श्रीनगर की ये तस्वीरें देखिए जिसमें सड़कों पर गाड़ियां की इतनी भीड़ है कि वहां पर ट्रैफिक जाम जैसे हालात हैं. देश और विदेश में ये भी डर फैलाया गया था कि कश्मीर में सन्नाटा छाया हुआ है, वहां कोई अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहा है लेकिन श्रीनगर के बाजारों में दुकानें खुली हुई हैं और लोग भी अपने घरों से बाहर निकल कर अपना काम और शॉपिंग कर रहे हैं. कुछ नेताओं ने ये भी दावा किया कि अब कश्मीर के छात्रों का भविष्य बर्बाद हो गया है लेकिन वहां के स्कूलों में भी छात्र पहुंच रहे हैं और पढ़ाई शुरू हो गई है. 18 नवंबर को कश्मीर में रेल सेवा भी शुरू हो गई है. ये तस्वीरें अपने आप में सामान्य हालात की सबसे बड़ी परिभाषा है.

कश्मीर की Reality रिपोर्ट पर लगातार बहस जारी है, इसलिए आज हमने जम्मू कश्मीर का एक तुलनात्मक अध्ययन किया है जिसमें धारा 370 से पहले और अब के हालात की तुलना की गई है. गृह मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2018 में 19 नवंबर तक पत्थरबाजी की 802 घटनाएं हुईं, जबकि इस साल अब तक 544 बार ही पत्थरबाजी हुई है. पिछले वर्ष हुए 614 आतंकी हमलों के मुकाबले. इस वर्ष अब तक 586 टेरर अटैक हुए हैं, यानी इनमें भी कमी आई है. लेकिन वर्ष 2018 में अगस्त से अक्टूबर के बीच 294 सीज फायर उल्लंघन के मुकाबले. इस वर्ष 950 बार युद्धविराम तोड़ा गया. इसमें तीन गुना वृद्धि होने की वजह ये है कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार से आतंकवादियों को भेजने की कोशिश कर रहा है. लेकिन अब उसे सफलता नहीं मिल रही है. 

इन आंकड़ों से आप समझ गए होंगे कि अनुच्छेद 370 के पहले और अब वाले कश्मीर में कितना बदलाव दिखाई दे रहा है. जम्मू कश्मीर को धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है और इस बदलाव को देखकर ऐसा लगता है कि जम्मू कश्मीर जल्द ही जन्नत बन जाएगा. केंद्र सरकार के मुताबिक सबसे बड़ी बात ये भी है कि 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से अबतक एक भी व्यक्ति की पुलिस फायरिंग में मौत नहीं हुई है.

जम्मू कश्मीर में इंटरनेट बंद होने का मुद्दा भी उठाया गया
इंटरनेट पर पाबंदी से जम्मू कश्मीर की जनता को दिक्कतें हो रही हैं, ये बात सच है लेकिन अभी लोगों की समस्या से ज्यादा देश के बारे में विचार किया जाना चाहिए. जम्मू कश्मीर में इंटरनेट का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए किया जाता है. 5 अगस्त के बाद से पाकिस्तान लगातार जम्मू कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहा है. अनुच्छेद 370 हटाने से पहले अगर किसी आतंकवादी को सुरक्षाबल घेर लेते थे तो अपनी जान बचाने के लिए वो WhatsApp ग्रुप की मदद से पत्थरबाजों को मैसेज भेजते थे. और कई बार पत्थरबाजों का गैंग आतंकवादियों को एनकाउंटर से बचा लेता था. सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों के प्रमुख भी सोशल मीडिया की मदद से ही जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकवादियों से Connected रहते हैं. आतंकवादियों के इस कनेक्शन को पूरी तरह तोड़ने और जम्मू कश्मीर की जनता की सुरक्षा के लिए इंटरनेट पर कुछ दिनों की पाबंदी जरूरी है. जम्मू कश्मीर में जो लोग इस वक्त DNA देख रहे हैं हम उनसे भी अपील करेंगे कि वो देशहित में कुछ दिनों के लिए इस परेशानी को स्वीकार करें. 

कहते हैं आप जिनके लिए चिंता करते हैं, उनके बारे में किसी भी गलत बात पर तुरंत भरोसा कर लेते हैं. और अगर अच्छी बात की जाए तो बार बार पूछकर ही यकीन करते हैं. जम्मू कश्मीर के साथ ऐसा ही हुआ है. जम्मू कश्मीर के बारे में भी दुष्प्रचार करके Fake News का प्रसारण किया गया . ये भ्रम फैलाया गया था कि वहां पर अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां नहीं हैं लेकिन कश्मीर के अस्पतालों के बारे में ‘अशुभ समाचार’ ढूंढने वाले अब निराश हो गए हैं . क्योंकि आज राज्यसभा में गृह मंत्री ने बताया कि जम्मू कश्मीर में Hospital खुले हुए हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं है.

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