ZEE जानकारी: ईरान में बदले हालात, जनता ने कहा- अमेरिका से नहीं खुद के देश से है डर

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भारत में युवाओं के विरोधाभास के बाद अब हम ईरान में प्रदर्शनों के विरोधाभास का विश्लेषण करेंगे. पिछले कुछ समय से हमारे देश और पूरी दुनिया में विरोध प्रदर्शनों का दौर चल रहा है… जिसमें लाखों की संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं. लेकिन अक्सर ऐसे प्रदर्शन रास्ता भटक जाते हैं. भारत में JNU के छात्रों का Protest इसका एक बड़ा उदाहरण है. वहीं पिछले तीन दिनों से ईरान में भी ऐसा ही हो रहा है. ईरान की जनता पिछले शुक्रवार तक अमेरिका के खिलाफ सड़कों पर विरोध कर रही थी. लेकिन अब ईरान की जनता अपनी सरकार का ही विरोध करने लगी है.

यानी कल तक जो लोग इरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए सड़कों पर थे.. आज वही सुलेमानी इनके लिए विलेन बन गया है. ईरान मानता है कि इस प्रदर्शन की पटकथा अमेरिका ने लिखी है . ये एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर है.इसलिए आज हम इसका एक संक्षिप्त विश्लेषण करेंगे .

ईरान की राजधानी तेहरान और कई शहरों में पिछले 72 घंटों से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. ब्रिटिश मीडिया का दावा है कि तेहरान में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गई हैं…और इसमें एक महिला की मौत भी हो गई है. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया है. अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है. क्योंकि ईरान में हो रही इन प्रदर्शनों के लिए एक बड़ी घटना जिम्मेदार है… इसलिए सबसे पहले आप उसे समझिए.

8 जनवरी को Ukraine इंटरनेशनल एयरलाइंस का एक यात्री विमान तेहरान से Ukraine की राजधानी Kiev जा रहा था. तेहरान से उड़ान भरने के बाद ईरान की सेना ने इस यात्री विमान पर मिसाइल हमला करके, उसे मार गिराया था . इस विमान में 176 यात्री और Crew Members सवार थे. जिसमें से 86 ईरान के नागरिक थे. इस प्लेन में ईरान के अलावा कनाडा, Ukraine, England, Afghanistan और Sweden के नागरिक भी सवार थे.

और ये सभी लोग इस मिसाइल हमले में मारे गए . दुर्घटना के बाद 3 दिनों तक ईरान ने विमान में तकनीकी खराबी की वजह से उसके क्रैश होने का दावा किया था… लेकिन 11 जनवरी को ईरान ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने Ukraine के यात्री विमान को गलती से मार गिराया था . ईरान की सेना का दावा है कि उन्होंने इस यात्री विमान पर अमेरिका की मिसाइल समझ कर हमला किया था .

और इस प्लेन क्रैश ने ईरान में होने वाले प्रदर्शनों की तस्वीर बदलकर रख दी है . विमान हादसे की जिम्मेदारी लेने के बाद से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई के खिलाफ आज तीसरे दिन भी हजारों लोग सड़कों पर हैं और खमेनेई के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इस प्रदर्शन में छात्रों की मौजूदगी ज्यादा है और इनकी नाराजगी उन अधिकारियों से है जिन्होंने शुरुआत में Ukraine के यात्री विमान को नुकसान नहीं पहुंचाने का दावा किया था.

सबसे पहले शनिवार को छात्रों ने इकट्ठा होकर Ukraine के यात्री विमान में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी… लेकिन बाद में इस शोक सभा में आई भीड़… अपनी ही सरकार का विरोध करने लगी . विरोध में शामिल कुछ लोग ईरान के सुप्रीम लीडर खमेनेई और जनरल सुलेमानी के Posters को जूते से कुचल रहे थे. ये प्रदर्शन हैरान करने वाला है क्योंकि कुछ दिनों पहले ही ईरान की जनता इन्हें सम्मान देते हुए अमेरिका से बदला लेने की कसमें खा रही थे .

इन प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश में ईरान की सड़कों पर सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगहों पर झड़प हुई है. तेहरान में Azadi Square पर महिलाएं भी अपनी सरकार के खिलाफ नारे लगा रही थीं… उनका कहना था कि उनका दुश्मन अमेरिका नहीं है. उनका दुश्मन देश के भीतर ही है .

इस प्रदर्शन में शामिल इन लोगों ने शायद कुछ दिनों पहले जनरल सुलेमानी के जनाजे में भी हिस्सा लिया होगा . इसी महीने की 2 तारीख को ईरान के जनरल सुलेमानी को अमेरिका ने मिसाइल हमला करके मार दिया था. तब ईरान की जनता ने सड़कों पर उतरकर अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ नारे लगाए थे. उनपर हमला करके बदला लेने की बातें की थीं और अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताया था.

लेकिन आज ईरान के लोग वहां की सरकार का विरोध कर रहे थे. जिस सुलेमानी को कुछ दिनों पहले वो अपना राष्ट्रीय नायक बता रहे थे. आज उसी के पोस्टर हटाए जा रहे थे… और उन्हें जूतों के नीचे कुचल दिया गया .आज ईरान की जनता ने वहां की सरकार के एक Propaganda को भी फेल कर दिया. आज तेहरान की एक यूनिवर्सिटी में जमीन पर अमेरिका और इज़रायल का झंडा पेंट किया गया था… लेकिन प्रदर्शनकारी इन झंडों पर पैर रखने से बचते दिखे…यानी अब ईरान की जनता अमेरिका और इज़रायल को अपना दुश्मन नहीं मान रही है.

ईरान की सरकार अमेरिका और इजरायल को दुश्मन बताकर उनका डर दिखाकर जनता को अपने पक्ष में करना चाहती है . लेकिन प्रदर्शनकारियों ने अपनी सरकार की इस चाल को समझ लिया है . वैसे ईरान की सरकार चाहे तो अब भी स्थिती को कंट्रोल कर सकती है. लेकिन इसके लिए उन्हें अपने देश के आम आदमी की फिक्र करनी होगी . जनरल सुलेमानी की हत्या के बाद से वहां पर राष्ट्रवाद और अमेरिका से बदला लेने का मुद्दा ट्रेंड कर रहा है… लेकिन ईरान की जनता को राष्ट्रवाद के साथ शुरक्षा, रोटी, कपड़ा और मकान की भी चिंता है . और सड़कों पर उतर कर जनता अपने नेताओं को यही बताने की कोशिश कर रही है.

वैसे ईरान की सरकार के खिलाफ ये प्रदर्शन सिर्फ सड़कों पर नहीं बल्कि Social Media पर भी हो रहे हैं . सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के पक्ष और विपक्ष में दुष्प्रचार हो रहा है, Propaganda फैलाया जा रहा है . Fake News फैलाई जा रही है, Doctored वीडियोज़ चलाए जा रहे हैं . ठीक वैसा ही जैसा भारत में भी आजकल हो रहा है . भारत और ईरान ही नहीं पिछले कुछ समय में दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश रहा होगा..जहां किसी ना किसी बात को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन ना हुए हों . ज्यादातर जगहों पर ये प्रदर्शन छोटी छोटी बातों को लेकर शुरू हुए और धीरे धीरे सरकार के प्रति बड़ी नाराज़गी में बदल गए .

उदाहरण के लिए जनवरी के महीने से.. France में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाए जाने का विरोध हो रहा है. Venezuela में न्यूनतम वेतन को 67 प्रतिशत बढ़ाने के बाद भी लोगों की जेब में दो वक्त की रोटी खरीदने के भी पैसे नहीं हैं इसलिए वहां भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं . Lebanon में लोग गरीबी के खिलाफ सरकार का विरोध कर रहे हैं… तो कुछ समय पहले ईरान में गैस के दामों में 56 पैसे की वृद्धि हो जाने से लोगों ने आंदोलन शुरु कर दिया था. इसी तरह Hong Kong में भी प्रत्यर्पण कानून के विरोध में पिछले वर्ष से शुरु हुए प्रदर्शन अब तक जारी हैं और इन प्रदर्शनों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है .

पिछले कुछ समय में Brazil, Iraq, Bolivia और Algeria जैसे देशों में भी आम जनता अभूतपूर्व तरीके से सड़कों पर उतरी और लोगों ने अपनी ही सरकार के प्रति नाराज़गी का इज़हार किया . कुछ देशों में प्रदर्शन अभी भी जारी है..तो कुछ देशों में सरकार को प्रदर्शनकारियों के आगे घुटने टेकने पड़े . छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर शुरु हुए आंदोलन आगे चलकर सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शनों में भी बदल गए . हैरानी की बात ये है कि इनमें से ज्यादातर प्रदर्शन लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों के खिलाफ हो रहे थे .

अंतरराष्ट्रीय लेखक Paolo के मुताबिक. सरकार के खिलाफ ये विद्रोह बताते हैं कि लोगों में व्यवस्था के प्रति नाराज़गी है. और ये ऐसी समस्या नहीं है जो वक्त बीतने के साथ दूर हो जाएगी. Paolo के मुताबिक ये प्रदर्शन एक बड़े वैश्विक संकट के आरंभिक लक्षण है और इन्हें नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता. आप कह सकते हैं कि सरकारों को लगने वाले ये छोटे छोटे झटके..किसी बड़े भूकंप की आहट हैं. हालांकि कुछ देशों में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन…दूषित राजनीति का भी परिणाम हैं…जहां कुछ असामाजिक, देश विरोधी और विदेशी ताकतें मिलकर सरकारों को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही हैं .

ईरान का आरोप है कि वहां हो रहे प्रदर्शनों की पटकथा अमेरिका ने लिखी है. वैसे आज ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और ब्रिटेन के ख़िलाफ़ भी विरोध-प्रदर्शन हुए हैं. लेकिन America के राष्ट्रपती Donald Trump ने प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया है… और अंग्रेजी और फारसी दोनों भाषाओं में ट्वीट किया है. Trump ने Tweet करके ईरान के नेताओं से कहा है कि वो अपने प्रदर्शनकारियों की हत्या ना करें. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका ईरान पर नज़र बनाए हुए है . डोनल्ड ट्रंप के ट्वीट से ऐसा लग रहा है.. जैसे अमेरिका हज़ारों मील दूर से ही..ईरान के विरोध प्रदर्शनों का आनंद ले रहा है .

ईरान इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है और यही संकट इन विरोध प्रदर्शनों की वजह है .
ईरान का पहला संकट.है कि ईरान में पिछले कुछ महीनों में भ्रष्टाचार और खराब अर्थव्यस्था को लेकर प्रदर्शन हुए थे और ईरान घरेलू समस्या से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा था . इराक में सैन्य ठिकानों पर हाल ही में ईरान के मिसाइल हमले के पीछे भी यही वजह बताई गई है.

– दूसरी दिक्कत है ईरान के खिलाफ अमेरिका की पॉलिसी. अमेरिका और ईरान एक दूसरे के साथ दोस्ती नहीं चाहते हैं. अमेरिका अब ईरान की अर्थव्यवस्था पर नए प्रतिबंध लगा रहा है . यानी दोनों देशों के बीच अब हालात सुधरने की कोई उम्मीद नहीं है.

– तीसरा मुद्दा है… ईरान का रणनीतिक लक्ष्य . ईरान पश्चिम एशिया में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है. वहीं अमेरिका खुद भी इस इलाके से अपनी सेना को हटना चाहता है लेकिन उसे डर है कि ऐसा करने से ईरान का वर्चस्व इस क्षेत्र में यानी पश्चिम एशिया में बढ़ जाएगा .

– ईरान और अमेरिका के बीच चौथी बड़ी समस्या है परमाणु समझौता . ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए 2015 में ये समझौता किया गया था . लेकिन वर्ष 2018 में राष्ट्रपती ट्रंप ने इस समझौते को रद्द कर दिया था . इस समझौते के टूटने का असर पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया पर पड़ेगा . क्योंकि अब ईरान परमाणु बम बनाने के और करीब आ गया है .

आज ब्रिटिश मीडिया ने एक बड़ी खबर दी है. उनके मुताबिक मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या में Israel की खुफिया एजेंसी भी शामिल थी. 3 जनवरी को जनरल सुलेमानी सीरिया की राजधानी Damascus से इराक के लिए प्लेन से रवाना हुए थे.

और ये खबर अमेरिका को Israel की खुफिया एजेंसी ने दी थी. इस सूचना के बाद इराक में ही अमेरिका ने जनरल सुलेमानी पर ड्रोन से हमला करके उनकी हत्या कर दी थी . एक और बड़ी बात ये है कि Israel के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एकमात्र विदेशी नेता थे जिन्हें इस हमले की खबर दी गई थी. कुल मिलाकर अमेरिका और Israel की जोड़ी पश्चिम एशिया में अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहती है. और इस जोड़ी को … ईरान अपने अस्तित्व पर खतरा मानता है.

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