Sharad Purnima 2019: अमृत बरसाती शरद पूर्णिमा की रात

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कहते हैं कि इसी पूर्णिमा को चंद्रमा अपनी समस्त सोलह कलाओं के साथ आकाश में होता है। ये कलाएं हैं- अमृत, मनदा, पुष्प, पुष्टि, तुष्टि, धृति, शाशनी, चंद्रिका, कांति, ज्योत्सना, श्री, प्रीति, विमला, अंगदा, पूर्ण और पूर्णामृत। वर्षा ऋतु की जरावस्था और शरद ऋतु के बालरूप के संधिकाल के शरद का चंद्र अपनी इन कलाओं के आभा- सौंदर्य से सहज ही मन मोह लेता है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रसंग है पूर्णावतार श्रीकृष्ण का महारास। “रास पंचाध्यायी” के अनुसार श्री (धन संपदा), भू (अचल संपत्ति), कीर्ति (यश प्रसिद्धि), इला (वाणी की सम्मोहकता), लीला (आनंद उत्सव), कांति (सौंदर्य और आभा), विद्या (मेधा बुद्धि), विमला (पारदर्शिता), उत्कर्षिणि (प्रेरणा और नियोजन), ज्ञान (नीर- क्षीर विवेक), क्रिया (कर्मण्यता), योग (चित्तलय), प्रहवि (अत्यंतिक विनय), सत्य (यथार्य), इसना (आधिपत्य) व अनुग्रह (उपकार); की कलाओं से गोपियां निधि वन की ओर खींची चली आई थीं। अध्यात्म के तत्ववेत्ता इसे महान घटना मानते हैं। श्रीकृष्ण यों आप्तकाम थे, लेकिन प्रेमदान का यह लीला विलास मनुष्य को अलौकिक आनंद देता है। इस अलौकिक उत्सव की स्मृतियों में अब तो शरद पूर्णिमा पर रासलीला का उत्सव जगह- जगह  बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।

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