HAWS : यहां तैयार होते हैं देश के व्हाइट डेविल, बेहद कठिन होती है ट्रेनिंग

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श्रीनगर: सेना के जवानों को केवल देश रक्षा के लिए ही बर्फीली पहाड़ियों में ट्रेंड नहीं किया जाता है, बल्कि उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए उनके बर्फ पर खेली जाने वाली खेलों के लिए भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया जाता है. देश के बेहतरीन कोच उन्हें तैयार करते हैं. जवानों का कहना है कि देश सुरक्षा में तो वह अपन लोहा मान चुके हैं अब लक्ष्य है खेलों में भारत का झंडा ऊंचा करना और ओलंपिक खेलों में सोने का तमगा हासिल करना है.

भारतीय सेना के जवानों को जो देश भर के सभी यूनिट से HAWS (high altitude warfare school) के स्कूल में आते हैं और बर्फीली पहाड़ियों में कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी देने के लिए सक्षम बनाया जाता है. इन चोटियों पर बचाव और रेस्क्यू भी सिखाया जाता है. इन जवानों को बर्फीली चोटियों पर अगर कोई दुर्घटना होती तो घायल को रास्ते या गाड़ी तक कैसे पहुंचाया जाए यह सिखाया जाता है.

HAWS में नवीनतम किस्म के उपकरण मौजूद हैं, एक जवान को उसके हौंसले के अलावा चाहिए वह कपड़े, बूट और टोपी तक ए ग्रेड का दिया जाता है. यहां केवल देश से ही नहीं, बल्कि विदेशों के सैनिक भी ट्रेनिंग के लिए आते हैं. यहां के सीखे हुए भारतीय सेना के जवान दुनिया के रेस्क्यू ऑपरेशनों में बुलाए जाते हैं.

देश के सभी जगहों पर तैनात सेना के जवानों में से हर साल करीब एक हजार को HAWS भेजा जाता है. यह वे जवान होते हैं जिनकी पोस्टिंग हाई ऐल्टिटूड स्नो बाउंड इलाकों में हुई होती है. यहां उन्हें 9 हफ्तों की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है.

HAWS देश का इकलौता समूल हैं जो 73 साल पहले 1947 में बना है और तब से देश के लिए जवानों को तैयार करता आ रहा है. यहां केवल बर्फीली चुनौतियों से ही नहीं लड़ना सिखाया जाता है, बल्कि गर्मियों में जवानों को पथरीली चोटियों पर भी ट्रेंड किया जाता है. बर्फीली पहाड़ियों पर देश के दुश्मनों और कुदरत की आफतों डंट कर मुकाबला करने वाले इन जवानों को व्हाइट डेविल कहा जाता है.

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