सोनिया गांधी को नहीं मिल सका अपने क्षेत्र में केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा करने का अधिकार

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    केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद ग्राम्य विकास मंत्रालय जिला विकास एवं समन्वय अनुश्रवण समिति (दिशा) का गठन करना भूल गया। ऐसे में प्रदेश की इकलौती कांग्रेस सांसद व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपने क्षेत्र में केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा करने का अधिकार अब तक नहीं मिल सका है। इसके चलते फिलहाल सांसद की अध्यक्षता में दिशा की बैठक भी संभव नहीं है। 

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    अमेठी संसदीय क्षेत्र सहित प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में दिशा का गठन हो चुका है। अमेठी में पूर्व सांसद राहुल गांधी को हटाकर केंद्रीय मंत्री व सांसद स्मृति ईरानी को दिशा का चेयरमैन बनाया गया है। सरकार बनने के 100 दिन बाद भी रायबरेली में दिशा का गठन न होने पर डीएम ने आयुक्त को पत्र भेजा है।

    आमतौर पर लोकसभा का चुनाव होने के बाद निर्वाचित सांसदों की अध्यक्षता में दिशा समिति का गठन होता है। जो हर तीन माह में केंद्रीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से अध्यक्ष और सहअध्यक्ष का मनोनयन किए जाने के बाद डीएम समिति का गठन करते हैं। 

    दिशा में सभी विधायकों, ब्लॉक प्रमुखों व संसद सदस्यों को शामिल किया जाता है। खास बात यह कि देश में नई सरकार के गठन के बाद लगभग सभी जिलों में दिशा का गठन कर दिया गया है, लेकिन रायबरेली के लिए अध्यक्ष व सहअध्यक्ष का मनोनयन नहीं किया गया है। इनके मनोनयन के बाद ही सांसद की अध्यक्षता में दिशा की बैठक हो सकती है।  

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