नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सट्टेबाजों का भरोसा 16 साल की ग्रेटा पर, विशेषज्ञ सहमत नहीं

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    संयुक्त राष्ट्र महासभा में जलवायु परिवर्तन पर आंदोलित कर देने वाले विचारों को सामने रख कर दुनियाभर में प्रसिद्ध हुईं ग्रेटा थनबर्ग इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित की गई हैं। सट्टेबाज यह मान रहे हैं कि यह पुरस्कार ग्रेटा को ही दिया जाएगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इससे राय नहीं रखते हैं।

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    स्वीडन की 16 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा पहले ही एम्नेस्टी इंटरनेशनल का सर्वोच्च सम्मान और राइट लिवलिहुड अवार्ड (वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार) से सम्मानित हो चुकी हैं। ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) वेबसाइट्स पर दुनिया के सर्वोच्च सम्मान के लिए ग्रेटा को मजबूत दावेदार बताया जा रहा है। 

    ऑस्लो में पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (प्रिओ) के निदेशक हेनरिक उर्डल ग्रेटा को नोबेल मिलने की संभावना को बेहद कम बताते हैं। उनका तर्क है कि जब कुछ लोग कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजग से संघर्ष बढ़ सकता है लेकिन फिर भी इस बात पर सहमति नहीं है कि क्या असल में यह सशस्त्र संघर्ष का कारण है।

    इसके साथ ही हेनरिक ने कहा कि ग्रेटा की कम उम्र इस पुरस्कार को एक सम्मान के स्थान पर बोझ की तरह बना देगी। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि ग्रेटा को यह पुरस्कार एक ही स्थिति में मिल सकता है। उन्हें मलाला की तरह पुरस्कार को साझा करना पड़ेगा।’ भारतीय कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को साल 2014 में में संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया गया था।

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