धारा 370 के बाद जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों के दिल में जगी बेहतर भविष्‍य की उम्‍मीद

0
57

नई दिल्‍ली: जम्‍मू और कश्‍मीर से धारा 370 खत्‍म होने के बाद लोगों के दिल में एक नई उम्‍मीद जगी हैं. इस बदलाव के बाद, उनको इस बात का भरोसा होने लगा है कि अब उनके गुरबत (गरीबी) के दिन खत्‍म होने वाले हैं. उनके बच्‍चों को न केवल अच्‍छी तालीम (शिक्षा)मिलने वाली है, बल्कि वे भी अब बेहतर रोजगार हासिल कर सकेंगे. कश्‍मीर के लोग अब केंद्र सरकार से यही उम्‍मीद कर रहे हैं कि जल्‍द से जल्‍द घाटी का विकास शुरू कर उनके लिए नौकरी के अवसर पैदा किए जाएंगे.

जम्‍मू कश्‍मीर के 2700 गांव का प्रतिनिधित्‍व करने वाले सरपंच फैयाज अहमद खान का कहना है कि जम्‍मू और कश्‍मीर में 370 धारा खत्‍म होने के बाद उन्‍हें बदलाव की नई उम्‍मीद नजर आ रही है. उन्‍होंने कहा कि धारा 370 को लेकर जो लोग सियासत कर रहे हैं, उनसे न ही उनका कोई लेना देना है और न ही घाटी का आम आदमी उनसे कोई वास्‍ता रखता है. फैयाज अहमद खान ने कहा कि हम आम आदमी हैं. हमें रोटी चाहिए, हमें रोजगार चाहिए. हमें उम्‍मीद है कि अब न केवल हमारे लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि हम एक बेहतर जिंदगी जी सकेंगे.

देखें लाइव टीवी

फैयाज अहम खान ने कहा है कि हर इंसान का सपना होता है कि बच्‍चे को पढ़ा लिखा कर बड़ा करूं. बच्‍चा पढ़ लिख जाएगा, तो अच्‍छी नौकरी कर उनका सहारा बनेगा. एक गरीब बच्‍चा पढ़ लिख भी जाए, तो नौकरी के दरवाजे बंद मिलते हैं. ब्‍यूरोकेसी और यहां के हुक्‍मरानों ने सबकुछ खाकर बर्बाद कर दिया है. अब हमें इस बात की उम्‍मीद है कि वादी में भ्रष्‍टाचार खत्‍म होगा, जिसने जो किया, अब उसका हिसाब होगा. नया रोजगार आएगा और हमारी अगली पीढ़ी बेहतर जिंदगी जी सकेगी.

संयुक्‍त राष्‍ट्र में पाकिस्‍तान को बड़ा झटका, कश्‍मीर पर खुली चर्चा की मांग ठुकराई गई

इसी पंचायत के एक अन्‍य सदस्‍य कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादी के लिए पैकेज लाने की बात कही है. उन्‍होंने कहा है कि प्राइवेट सेक्‍टर और इंडस्‍ट्री अब जम्‍मू और कश्‍मीर में आएंगी. हमें उनके इस कदम से बेहद आशाएं हैं. हमें उम्‍मीद है कि पीएम मोदी के इस कदम से वादी में बेरोजगारी और गुरबत खत्‍म होगी. पंचायत में मौजूद एक अन्‍य शख्‍स ने कहा कि पूरी वादी में सबसे ज्‍यादा वोटिंग कुपवाड़ा से होती है. यहां धारा 370 से आम लोगों का कोई लेना देना नहीं है, कितनों को इसके बारे में बता भी नहीं होगा. इसका इस्‍तेमाल तो सियासतदान और अफसर अपनी जेबों को भरने के लिए करते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here