जामिया में नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर

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    कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौपड़ा नागरिकता कानून के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बता दें कि जामिया पर सीएए और एनआरसी के खिलाफ एक महीने से ज्यादा से विरोध चल रहा है। यह दिग्गज नेता आज इसी प्रदर्शन में शामिल हुए। 

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    वहीं जामिया में 15 दिसंबर को हुई तोड़फोड़ पर यूनिवर्सिटी की कुलपति नजमा अख्तर ने कहा कि मानवाधिकार आयोग की टीम 14 जनवरी को परिसर का दौरा करेगी। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर वाले मामले में टीम घायल छात्रों और गवाहों के बयान व सबूत लेगी। नजमा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि टीम हमारे दृष्टिकोण से देखने की कोशिश करेगी।   
     

    जामिया के छात्रों द्वारा सीएए के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन को एक महीने से ज्यादा हो गया है। कड़ी सर्दी में भी छात्र और स्थानीय लोग यहां से पीछे हटने को तैयार नही हैं। शुक्रवार शाम को भी प्रदर्शन स्थल पर कई सामाजिक व राजनीतिक लोगों ने पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया था।
     
    जिनमें आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमएआईएम) के प्रवक्ता आसिम वक़ार और महिला शिक्षाविद जोया हसन प्रमुख रूप से शामिल हुए थे। यहां आसिम वकार ने कहा था कि मैं यहां राजनीति नहीं करने आया हूं, बल्कि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपने अधिकार और संविधान की रक्षा के लिये लड़ें, जिससे भारत की आत्मा बची रहे। 

    उन्होंने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए भरोसा दिलाया था कि उनकी पार्टी उनके साथ है। यह लड़ाई केवल मुस्लिम और सरकार के बीच नहीं हैं, बल्कि ये भारत और सरकार के बीच की लड़ाई है। इस दौरान यहां पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के वकील जेड. के. फ़ैजान ने कहा था कि सीएए काला कानून है और संविधान के विरूद्ध है। सरकार छात्रों के विरोध से बुरी तरह घबराई हुई है। 

    जामिया के पूर्व कुलपति मुशीरूल हसन की पत्नी और प्रख्यात शिक्षाविद् जोया हसन ने भी छात्रों के बीच पहुंचकर उनका साथ देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद उन्होंने इतना बड़ा आंदोलन पहले कभी नहीं देखा। निर्भया और अन्ना आंदोलन भी केवल दिल्ली तक ही सीमित था, लेकिन जामिया के छात्रों का सीएए के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन देशव्यापी हो गया है। 

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