जम्मू कश्मीर: 48 घंटे में 32 हिमस्खलन, -57 डिग्री टेम्परेचर से सेना कर रही मुकाबला

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श्रीनगर: इस बार कश्मीर में भारी बर्फबारी की मार सेना को झेलनी पड़ रही है. पिछले 48 घंटे में सेना की अलग-अलग चौकियों के आसपास 32 बार हिमस्खलन हो चुका है. मंगलवार सुबह मछिल सेक्टर में हुए हिम स्खलन में पांच जवान बर्फ में दब गए. इनमें से 4 को बचाव दल ने निकाल लिया, लेकिन एक जवान अब तक लापता है. बचाए गए चार में एक जवान की हालत स्थिर है, दो की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है और एक की हालत गंभीर है. 

तंगधार में हिम स्खलन की चपेट में आए 7 सैनिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया. इसी तरह नौगांव में हिम स्खलन में फंसे 4 बीएसएफ जवानों को बचा लिया गया लेकिन बाद में एक कांस्टेबल की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई.

पिछले 48 घंटे में गुरेज़, बांदीपोरा, कुपवाड़ा, नौगांव और बारामूला के ऊंचाई वाले स्थानों पर भारी बर्फबारी हुई है. सियाचिन में न्यूनतम तापमान शून्य से 57 डिग्री नीचे चला गया है. ताज़ा बर्फबारी के आंकड़े बताते हैं कि इस बार बर्फबारी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. गुरेज़ में 51 सेमी, मछिल में 117 सेमी, केरन में 56 सेमी, नौगांव में 122 सेमी और उड़ी-गुलमर्ग में 61 सेमी बर्फ गिरी है. सेना की चौकियों के आसपास हुए हिमस्खलन में ज्यादातर सैनिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. गुरेज़ के कंजलवान में भारी हिम स्खलन का समय से अंदाज़ा लगाकर 200 जवानों को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया.

सेना हिमस्खलन का अंदाज़ा लगाने और उससे बचाव का अभ्यास करती रहती है. ऊंचाई पर तैनात होने वाले सभी सैनिकों को हिम स्खलन के दौरान बरती जानी वाली सावधानियां और हिमस्खलन में फंसने पर बचाल के काम की लगातार ट्रेनिंग दी जाती है. इसलिए इस बार पड़ी बहुत ज्यादा सर्दी और बर्फबारी के बावजूद सेना को बहुत कम नुकसान झेलना पड़ा है. भारतीय सेना दुनिया की उन गिनी-चुनी सेनाओं में से है जो इतनी ऊंचाई पर तैनात है. सियाचिन में भारतीय सेना की तैनाती 21000 फीट तक की ऊंचाई पर है.

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