खुलासा! सस्ते सामानों से खेल करने वाले कर रहे करोड़ों के वारे-न्यारे, ऐसे चल रहा पूरा नेटवर्क

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नई दिल्ली: आज हम चीन की तरफ से नई साजिश का खुलासा करने वाले हैं. ये खुलासा आपको चौंका देगा. हम आप जो सस्ता सामान चीन से आने दे रहे हैं, वो दरसल एक बहुत बड़ा सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है. वो सिंडिकेट जो हवाला नेटवर्क चलाता है. हमने हवाला की रकम का लेनदेन मॉरीशस, केमेन आईलैंड जैसे रास्ते से सुनी थी. अब हवाला लेनदेन का रास्ता व्हाया चीन भी हो गया है. आइये समझते हैं कि ये कारोबार कैसे हो रहा है. 

अक्सर चीनी माल लेकर खरीद कर आप खुश हो जाते हैं कि सस्ता मिल गया तो जान लीजिए कि हो सकता है कि आप उस नेटवर्क के मंसूबे पूरा कर रहे हों जो भारत की अर्थव्यवस्था तबाह करना चाहते हैं.  5 -10 – 50-100-200-500 रुपये का सामान खरीदकर आप सोच रहे हों कि बढ़िया डिस्काउंट मिल गया पर इन सस्ते सामानों से खेल करने वाले करोड़ों का खेल कर रहे हैं. दरसल, इन प्रोडक्ट की असली कीमत भले ही कुछ और हो लेकिन ये प्रोडक्ट बहुत सस्ते रेट पर इंपोर्ट हो रहे हैं. भारत के बाज़ार में आने के बाद इनकी कीमत भले ही बढ़ जाती है लेकिन सस्ते इंपोर्ट से भारत को मिलने वाली ड्यूटी यानी टैक्स की चपत लगती है. सूत्र ये बताते हैं कि इस रास्ते से हवाला लेन देन के लिंक भी मिली है जिसकी तफ्तीश चल रही है. 

पिछले हफ्ते कॉमर्स मिनिस्ट्री के इनपुट पर इंटेलीजेंस विभाग के छापे से पता चला कि इंपोर्टर्स ने स्पोर्ट्स प्रोडक्ट जैसे स्विमिंग कैप, हैंड पावर ग्रिप, बैट मिंटन रैकेट, जिम ग्लव्स, स्विंमिंग गॉगल जैसे सामानों के औने पौने दाम में इंपोर्ट किए जबकि इनकों बेचते समय इनके रेट ज्यादा रखे और ग्राहकों को बिल नहीं दिया. 

इनमें से कुछ सामान तो 50 पैसे 60 पैसे 1 रुपये 2 रुपये जैसी दरों पर इंपोर्ट किए गए. सूत्रों के मुताबिक कईं आयातकों के सस्ते सामानों पर नज़र रखने पर इंपोर्ट और एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के बीच अवैध तरह से लेनदेन का भी पता चला है जिससे हवाला के लिंक के संकेत मिले हैं. इसकी तफ्तीश जारी है. एंजेंसियों की नज़र अब इन इंपोर्टर्स पर गड़ गई है और इस तरह कि बिलिंग करने वालों की सख्ती से जांच पड़ताल की जा रही है. वहीं सरकार ने ऐसी लिस्ट भी बना ली है जिनमें इस तरह से खेल हो रहा है.

लिस्ट में शामिल आयात होने वाले आइटम  हैं – प्लास्टिक प्रोडक्ट, स्पोर्ट्स उपकरण, लैदर गुड्स, नॉन लैदर फुटवेयर, खिलौने, फर्नीचर, बच्चों के कपड़े,सेट टॉप बॉक्स. इनके आयात पर कड़ी नज़र रखी जा रही है . 2019 में भारत चीन के बीच 92 अरब डॉलर का कारोबार हुआ है. भारत 17 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट करता है जबकि चीन से करीब 75 अरब डॉलर का सामान भारत आता है.

ये व्यापार घाटा भारत के लिये पहले से ही चिंता का विषय है और सस्ता सामान देश के घरेलू कारोबारियों को पहले ही बुरी तरह से प्रभावित कर चुका है. आने वाले समय में सरकार चीन से गैर ज़रुरी सामानों के इंपोर्ट को कम करने की रणनीति बना चुकी है. आयात-निर्यात के इस खेल से सरकार के कान खड़े होना स्वाभाविक है. सरकार इस पूरे नेटवर्क के आखिरी छोर तक पहुंचने की कवायद में है ताकि कड़ा सबक दिया जा सके. 

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