कश्मीर में चल रही है सेना की भर्ती, भारतीय फौज का हिस्सा बनने आतंकग्रस्त जिलों से पहुंचे हजारों युवा

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श्रीनगर: भारतीय सेना में शामिल होने के लिए दक्षिणी कश्मीर के आतंकग्रस्त जिलों से हज़ारों की संख्या में युवा पहुंचे. 110 स्थानों को भरने के लिए करीब 2000 युवा पहुंचे. सेना के अनुसार इस बार युवाओं का रुझान पहले से बेहतर रहा है. दक्षिणी कश्मीर के युवाओं का सेना में भर्ती होना दर्शाता है कि घाटी के युवाओं के दिलों में सेना को लेकर अच्छी सोच है और सेना में भर्ती होकर वे अपना जीवन संवारना चाहते हैं.

श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र रंगरेठ में स्थित जैकलाई रेजिमेंटल सेंटर में शनिवार को भारतीय सेना द्वारा भर्ती रैली का आयोजन किया गया था. इस भर्ती में आतंकग्रस्त दक्षिणी कश्मीर के जिलों से हज़ारों की संख्या में युवा इसमें भाग लेने के लिए पहुंचे थे जिनमें काफी जोश देखने को मिल रहा था. भर्ती के लिए आए युवा बेहद उत्साहित दिखे. तमाम युवा शनिवार सुबह होने वाली भर्ती प्रक्रिया के लिए शुक्रवार शाम से ही भर्ती स्थल पर पहुंच गए थे और रात गेट के बाहर गाड़ियों में ही बिताई. इन युवाओं का मानना था कि सेना में भर्ती होकर एक तो रोजगार मिलेगा दूसरा इज्ज़त की ज़िन्दगी जीने को भी मिलेगी. वह देश पर जान निछावर करने को भी तैयार दिखे. बता दें कि यह भर्ती रैली 21 अक्टूबर तक जारी रहेगी जिसमें से 18 अक्टूबर तक जैकलाई रेजिमेंटल सेंटर में यह प्रक्रिया जारी रहेगी.
 

सेना की 162 टेरिटोरियल आर्मी रेजिमेंट के कमांडेंट जिनकी देखरेख में भर्ती जारी थी, कर्नल आरआर सिंह ने बताया कि “आज पहले दिन केवल दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम, पुलवामा और अनंतनाग जिलों के युवाओं के लिए भर्ती है. जिसमें काफी अच्छा रुझान देखने को मिल रहा है. उन्होंने बताया कि 12 से 21 अक्टूबर तक चलने वाली भर्ती रैली में 162 इन्फेंट्री बटालियन टीए जैकलाई और 163 इन्फेंट्री बटालियन सिखलाई के लिए भर्ती होनी है. और 110 रिक्तियों के लिए पहले दिन फिजिकल में शामिल होने के लिए करीब 2000 से 3000 युवा पहुंचे हैं.” सिंह ने बताया कि आतंकग्रस्त जिलों से युवाओं का यह रुझान दर्शाता है कि भारतीय सेना के लिए लोगों के दिलों में एक अच्छी सोच है खासकर वहां के नौजवानों में. उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी इन जिलों से अच्छा रुझान देखने को मिला है लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही है. उन्होंने कहा कि यह एक प्रक्रिया है घाटी के युवाओं को मुख्यधरा में शामिल करने की ताकि उन्हें एक मौका प्रदान किया जाए. सिंह ने यह भी कहा कि सेना हमेशा यहां के युवक को देशभक्ति की मिसालें पेश करने के साथ-साथ उन्हें रोजगार का मौका प्रदान करने की कोशिश करती आई है.

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भर्ती में शामिल होने के लिए पहुंचे युवाओं में भी काफी उत्साह देखने को मिल रहा था. कुछ युवा सेना में एक इज्जत भरी ज़िन्दगी गुजारने के लिए शामिल होना चाहते हैं जबकि कुछ रोजगार हासिल करने के लिए. कुलगाम के रहने वाले हसीब बशीर जिसके पिता 1995 में अनंतनाग जिले के सृगुफ्वारा में आतंकी हमले में शहीद हुए थे ने बताया कि वह भी अपने पिता की तरह देश के लिए अपनी जान न्योछावर करना चाहता है. उसने बताया कि मेरे पिता 3 राष्ट्रीय राइफल्स में थे और जब तक वो अपने होश संभालता वह इस दुनिया से चले गए. लेकिन उसके गांव वाले उनके शौर्य के बारे में उसे बताते आए हैं इसलिए वह भी सेना में जाकर वही इज्ज़त कमाना चाहता है. 

एक अन्य युवा उमर ने बताया, “बहुत युवा बेरोजगार हैं. सेना में आकर रोज़गार के साथ इज्ज़त की ज़िन्दगी मिलेगी. मैं बाकी युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए सलाह देता हूं, गलत रास्तों पर जाने से बेहतर है सेना में भर्ती होना और इज्ज़त और रोज़गार दोनों हासिल करें.” आपको बता दें कि सेना का यह भर्ती अभियान श्रीनगर में 18 अक्टूबर तक चलेगा और फिर 21 अक्टूबर तक घाटी के अन्य हिस्सों में चलेगा. यह घाटी में युवाओं को रोज़गार देने के सरकार के अभियान का हिस्सा है जिसका वादा प्रधानमंत्री मोदी ने घाटी के युवाओं से किया है.

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