‘उद्धव राज’ में नहीं रुक रही किसानों की आत्महत्याएं, विधायक-मंत्रियों की आमदनी में चौगुना इजाफा

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मुंबई: देशभर समेत महाराष्ट्र के नेताओं की आमदनी और संपत्तियों में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन दूसरी तरफ किसानों की आमदनी बढ़ने के बजाय किसानों की आत्महत्याओं की घटनायें बढ़ी हैं. किसानों की आत्महत्या को लेकर महाराष्ट्र देश में नंबर-1 बना हुआ है. हाल में जारी किए गए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों से महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार के हाथ पांव फूले हुए हैं. देशभर में बीते साल 10349 किसानों की आत्महत्या के आंकड़े जारी किये गये हैं जिसमें महाराष्ट्र के 3594 किसानों की आत्महत्या के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. महाराष्ट्र बीते महज नवंबर महीने में तीन सौ किसानों ने आत्महत्या कर ली.  

महाराष्ट्र भले ही देश में विकसित प्रदेशों की कतार में खडा हो लेकिन देशभर में किसानों की होने वाली खुदकुशी का एक तिहाई यानि 34.7 फीसदी सुसाईड अकेले महाराष्ट्र में हुआ है. महाराष्ट्र में विदर्भ और मराठवाडा इलाके में सबसे ज्यादा किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं.

मुसीबतों का पहाड़ टूटा
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद के बाल्वे परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पडा है. परिवार की कमाई का महज एक सहारा किसान प्रशांत बाल्वे ने खुद को फांसी लगा ली.

बैंक से कर्ज ले रखा था
दरअसल, बाल्वे ने फसल के लिये बैंक से कर्ज ले रखा था और कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा था. फसल पिछली तूफानी बारिश में पूरी तरह चौपट हो गई थी. आर्थिक तंगी से परेशान हाल किसान ने बीते महीने अपने ही खेत के पास एक पेड़ से लटककर खुदकुशी कर ली.

मृतक किसान के भाई उत्तरेश्वर बाल्वे ने बताया, ”वह पुणे से बस से आया था. इसके बाद उसने घर से रस्सी ली और पेड़ पर फंदा लटकाकर झूल गया. पत्नी मौके पर पहुंची और देखकर रोने लगी. उन्होंने कहा कि स्थानीय नेता आये और बच्चों की पढ़ाई का भार उठाने का भरोसा दिया है.

आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई
इस किसान परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. घर की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई है. बच्चों की शिक्षा और घर जैसे-तैसे चल रहा है.  बीते महीने प्रशांत बाल्वे ने खुदकुशी की थी और सरकारी अमले ने अब तक एक महीने के बाद भी परिवार की सुध नहीं ली है.

पत्नी पर आन पड़ा बोझ
किसानों की खुदकुशी से बदहाल महाराष्ट्र के दूसरे इलाकों में भी हालात बेहद दुखद हैं. प्रदेश के अमरावती जिले के चाकोरा इलाके के किसान सुधाकर पाटेकर के घर में भी मातम है. पिछले कई साल से खेती में उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है. बैंक के कर्ज के बोझ तले दबे सुधाकर ने भी मौत को गले लगा लिया. सुधाकर की पत्नी और चार बच्चे हैं. घर चलाने का बोझ अब पत्नी पर आन पड़ा है.    

देशभर में 10655 किसानों ने की खुदकुशी
नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 में देश भर में किसानी से जुड़े 10349 लोगों ने खुदकुशी की, जिसमें से महाराष्ट्र के 3594 किसान थे. साल 2017 में देशभर में 10655 किसानों ने खुदकुशी की जिसमें से महाराष्ट्र से 3701 किसान थे.

कर्ज के जाल में फंसता ही गया किसान
केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं बनाई, लेकिन किसान कर्ज के जाल में फंसता ही गया. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार ने 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने की योजना का ऐलान कर दिया है. महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्ज माफी योजना के तहत 1 अप्रैल 2015 से लेकर 31 मार्च 2019 के बीच लिया गया. किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का सरकारी फरमान जारी हैं. हालांकि, इन सब सरकारी तरकीबों से किसानों की आत्महत्या थमने का नाम नहीं ले रही हैं.

सरकार ने भी माना
प्रदेश के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा, किसानों की आत्महत्याओं में इजाफा हुआ है ये सही है और बेहद दुखद है. मेरी सरकार ने किसानों की हितकारी योजना लागू की है. प्रशासन को सरकार ने ताकीद किया है कि ऐसे पीड़ित परिवार की मदद में चुस्ती बरतें.

कर्ज माफी की सौगात दी
किसानों महाराष्ट्र की मौजूदा उद्धव ठाकरे सरकार ने कर्ज माफी की सौगात दी है. हालांकि सूबे की पिछली सरकार ने भी साल 2017 में 44 लाख किसानों का 18 हजार करोड़ रुपये का लोन माफ कर दिया था. लेकिन प्रदेश में किसानों की आत्महत्या थमी नहीं.

ये एक बेहद पेचीदा विषय
पूर्व वित्त मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने कहा, ये सरकार और कदम उठाये तब ही किसान आत्महत्या थमेगी. ये एक बेहद पेचीदा विषय है. सर्वांगीण विकास से इस जटिल समस्या से छुटकारा मिल सकता है.

विधायकों की औसत आमदनी दुगुनी हुई
वहीं, बात करें अब नेताओं की तो चाहे किसी भी पार्टी का क्यों ना हो, महाराष्ट्र में पिछले 5 सालों में सभी विधायकों की औसत आमदनी दुगुनी हुई है. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में 118 विधायक दुबारा चुने गए. इनकी औसत आमदनी 2014 में 14.55 करोड़ रुपए थी जो साल 2019 में बढ़कर औसत 25.86 करोड़ रुपए हो गई. ज़ाहिर है कि नेताओं की आमदनी का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है लेकिन किसानों की आमदनी का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है, क्योंकि किसानों के लिए शुरू की गई तमाम योजनाएं फेल हो गईं. जानकारों का मानना है कि कर्जमाफी भी काम नहीं आ रही है.

फडणवीस की संपत्ति 3.86 करोड़ रुपये हुई
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संपत्ति बढ़कर 3.86 करोड़ रुपये हो गई है. महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट की तीन गुना आमदनी बढ़ी है. थोराट की आमदनी बढ़कर 30 लाख 19 हजार रुपये हो गई है.

कर्जमाफी से आत्महत्या नहीं रुकेंगी
कृषि मामलों के जानकारों की मानें तो किसानों को बेहतर मार्गदर्शन की जरूरत है. उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की योजनाओं का वक्त पर लाभ पहुंचा कर ही उन्हें गलत कदम से रोका जा सकता है. अर्थशास्त्री देवेंद्र वसाल ने कहा, महज कर्जमाफी से आत्महत्या नहीं रुकने वाली है. केंद्र सरकार और राज्यसरकारी की किसान कल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर पहुंचना जरूरी है. किसानों को जानकारियों का भी अभाव है और सही मार्गदर्शन और आर्थिक मदद से उनके जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति को मजबूत करके ही आत्महत्याएं रोकी जा सकती हैं.

इस वजह से किसानों पर दोहरी मार पड़ी
महाराष्ट्र के किसानों की फसलें इस बार बेमौसम बारिश से कई इलाकों में चौपट हो चुकी हैं. इस वजह से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है. किसानों पर बैंक के कर्ज का ब्याज भी बढ़ता जा रहा है. कृषि के जानकार मानते हैं कि जिन इलाकों में बेमौसम बारिश की मार नहीं पड़ी है, वहां के किसानों के खेती उत्पाद को बाजार कीमत दिलाने की तरकीबें तलाशने से किसानों को एक खास प्लेटफार्म देकर उनके स्तर को सुधारा जा सकता है.

उपाय ढूंढा जा सकता है
कृषि मामलों की जानकार वनिता जाधव पिसे ने कहा, किसानों को उनकी फसलों की सही जानकारी और उनकी खेती के प्रोडक्ट को सीधे बाजार तक पहुंचाने के प्रबंध से इस समस्या का कुछ हद तक उपाय ढूंढा जा सकता है.

आत्महत्या की नौबत नहीं आएगी
किसान नंदा शेलार ने बताया, मैंने अपनी फसल को तरकीब से उगाया और उसे सही मार्केट में बेचती हूं. इससे मेरी कमाई थोड़ी बेहतर हो गई है. हर किसान को तरकीबों के साथ अपनी खेती करनी चाहिए. आत्महत्या की नौबत नहीं आएगी.

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