आखिर सरकारी पूंजी को घरेलू बैंक में जमा करने को लेकर क्यों हो रहा है विवाद?

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भुवनेश्वर: सरकारी पूंजी के घरेलू बैंक में जमा को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. 2011 में इसी शिकायत से नौकरी से बर्खास्त हुए थे IAS टॉपर प्रफुल्ल मिश्रा. अब आइएएस अधिकारी विजय केतन उपाध्याय भी विजीलैंस के द्वारा पकड़े जाने पर नौकरी से बर्खास्त होने के साथ-साथ जेल में हैं. उद्यान विभाग के बाद अब जगन्नाथ मंदिर तथा बेरहामपुर महानगर निगम के पैसे घरेलू बैंक में जमा को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. सरकारी फंड घरेलू बैंकों में जमा रहना कोई अपराध नहीं है, पर किन किन परिस्थितिओं में ये कदम उठाया जाएगा, इसके ऊपर अधिकारी और खासकर अर्थ विभाग की अनुमति लेना आवश्यक है. आइए नजर डालते हैं क्या हैं फाइनेंस विभाग की गाइडलाइंस. 

चिठ्ठी नंबर 32648, तारीख 10.10.2018, तत्कालीन फाइनेंस सचिव तुहिन कांत पाण्डे ने हर एक विभाग को ये पत्र लिखा था, जिसमें ये स्पष्ट रूप से बताया गया था कि सरकारी राशि कौन सी बैंक में जमा हो सकती है, इसीलिए बैंकों को कौन सी शर्त पूरी करनी होगी. बैंकों की लोन देने की सामर्थ्य, ग्रामीण नेटवर्क, एसएचजी लिंकेज, मुद्रा योजना, लोन बगैरह कई सारे मानदंड को लेकर सूची बनाई गई थी. इसमें 17 केंद्र सरकार की अतंर्गत की बैंक, 8 घरेलू बैंक, और राज्य की कोऑपरेटिव बैंक अधीन 3 बैंक में ये पैसे जमा करने की अनुमति थी. इसमें यस बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस फेडरल बैंक, सिंडिकेट बैंक, बंधन बैंक जैसे घरेलू बैंकों का नाम था. 

लेकिन ये प्रावधान भी थे कि एक बैंक से दूसरे बैंक को स्थानांतर करने के समय फाइनांस विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. ये बात सचिव अशोक मीणा ने कही. सिर्फ इतना ही नहीं, बिना अनुमति के मनी ट्रांसफर को नियम का उल्लंघन माना जाएगा. तुलनात्मक रूप से घरेलू बैंको से ज्यादा ब्याज मिलता है, इसीलिए सरकारी अफसर घरेलू बैंकों को ज्यादा पसंद करते हैं, ये कहा जाता है. लेकिन तत्कालीन अर्थ मंत्री इसके पीछे कई और रहस्य होने की आशंका जताते हैं. मार्केटिंग कंपनी की तरह प्राइवेट बैंक में पैसे जमा करने पर कमीशन भी मिलता है. 

यानीकि ड्राइंग दिसबसमेंट ऑफिसर के हाथ में सरकारी अर्थ प्रबंधन की पावर होती है, और वो कभी कभी अपने स्वार्थ के लिए सरकार की अनुमति के बिना ये ट्रांसफर कर देते हैं. इस शिकायत पर 2011 में IAS  टॉपर प्रफुल्ल मिश्रा निलंबित हुए थे. अब विजय केतन उसी आरोप से जेल में हैं. सरकार की बिना अनुमति से ऐसा करना  गलत है, अर्थ मंत्री पंचानन कानूनगो ने ये जानकारी दी. BJD  भी ऐसी ही संभावना को स्वीकार कर रहा है.   

घरेलू बैंकों को सरकारी फंड का ट्रांसफर करते समय जिले में कार्यरत DDO, डीएम, सरकारी उद्योगों की गवर्निंग कमेटी और दूसरे विभागों और फाइनेंस मिनिस्ट्री से  अनुमति लेना अनिवार्य है.   

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